भारत की अर्थव्यवस्था पर आनंद महिंद्रा बोले- सबसे ज्यादा पीड़ित युवा और महिलाएं

भारतीय अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए, महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने शुक्रवार को बड़े पैमाने पर रोजगार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने शुक्रवार को 76 वें शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता कम होने से भारत के लिए एक बड़ा अवसर है क्योंकि कंपनियां और देश वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश करेंगे। वहीं इस पर महिंद्रा ने कहा, “कुल मिलाकर, स्थिति भारत के लिए अवसरों से भरी है। हालांकि, इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए हमें कुछ अंतरालों को भरने की जरूरत है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण (अंतराल) रोजगार रहित विकास है।“

वहीं, महिंद्रा ने नौकरियों में वृद्धि नहीं होने पर सामाजिक अशांति की संभावना की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा “यदि युवा आबादी के साथ नौकरियां नहीं बढ़ती हैं तो दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी में से एक के साथ, सामाजिक अशांति की संभावना की कल्पना करना आसान है।“

सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले बिजनेस लीडर ने कहा कि सरकार अपना काम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार ने 2023 तक सरकारी नौकरियों में 10 लाख लोगों को नियुक्त करने की योजना की घोषणा की है। यह देखते हुए कि हमारे पास 900 मिलियन मजबूत वर्कफोर्स है, यानी अभी बहुत कुछ करना बाकी है।”

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय बेरोजगारी दर लगभग 7-8 प्रतिशत है। “ऐसा इसलिए है क्योंकि नौकरी की वृद्धि जीडीपी वृद्धि के साथ तालमेल नहीं खा रही है।“ साथ ही महिंद्रा ने रोजगार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि काम करने में सक्षम श्रम बल का केवल 40 प्रतिशत ही वास्तव में काम कर रहा है या काम की तलाश में है। इसके उल्ट, अमेरिका में श्रम भागीदारी दर 60 प्रतिशत से अधिक है।

वहीं,मुद्रास्फीति पर उन्होंने कहा कि हालांकि यह व्यावसायिक दृष्टिकोण से एक चिंता का विषय है, फिर भी यह उत्पादक संपत्तियों पर रिटर्न की न्यूनतम सीमा उपलब्ध करा सकता है। यह एक बिजनेसमैन को अधिक रिस्क लेने में सक्षम बनाता है।