कोविड काल में बढ़ी दिव्यांगों के इलाज की चुनौतियां

चार दिवसीय गोल्डन जुबली सेमिनार में पार्शियल दिव्यांगता के साथ ही दुर्घटना जनित बीमारियों पर चर्चा की जाएगी। डॉ. वाधवा ने कहा कि हमारा उदेश्य सभी के लिए एक बेहतर समाज की स्थापना करना है दिव्यांग कोई भी हो सकता है इसलिए उन्हें भी सामान्य जीवन जीने का अधिकार है और आधुनिक मेडिकल उपकरणों की सहायता से अब यह संभव है।

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जेनेवा में आयोजित बैठक में वर्ष 2017 में दिव्यांगों के इलाज और सुविधाओं को बेहतर करने के लिए ग्लोबल सस्टेनेबल में शामिल किया गया। वर्ष 2019 में इसी संदर्भ में एक और बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बीते तीन साल में हुए सुधारों पर मंत्रणा की गई। इसी बीच कोविड काल ने दिव्यांगों के इलाज में आने वाली बाधाओं को उजागर किया। लेकिन इसी समय दिव्यांगों के इलाज के लिए संसाधनों को अधिक बेहतर करने की जरूरत को भी महसूस किया गया। भारत सरकार द्वारा कई तरह के प्रयास भी किए गए, जिसमें एक जून वर्ष 2021 से सात बीमारियों की जगह 21 बीमारियों को दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल कर लिया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के वर्ष 2030 तक वैश्विक मिलेनियम सस्टेनेबल थीम का अनुसरण करते हुए इन्द्रप्रस्थ एसोसिएशन ऑफ रिहेबिलिटेशन मेडिसिन के दिल्ली चैप्टर तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलिटेशन का 50वां वार्षिक सम्मेलन सफदरजंग अस्पताल में आयोजित किया जाएगा। 24 से 27 मार्च के बीच होने वाले इस सम्मेलन के इस वर्ष की थीम पोस्ट कोविड वल्र्ड- स्टे्रथनिंग हेल्थकेयर रिहेबिलिटेशन 2030 रखा गया है। इस बावत आयोजित प्रेस वार्ता में वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के एडिशनल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रो. आरके वाधवा ने बताया कि कोविड का समय दिव्यांगों के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आया, कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करते हुए, दिव्यांगो की देखरेख करना काफी मुश्किल रहा, बावजूद इसके सफदरजंग अस्पताल के रिहेब टीम ने दिव्यांगों के लिए टेलीमेडिसिन सेवा संचालित की, इसके साथ ही कोविड पल्मोनरी रिहैब सुविधा से भी मरीजों के इलाज को सुचारू रखा गया।

डॉ. आरके वाधवा ने बताया कि कोविड के कई मरीज ऐसे भी देखे गए जिन्हें लंबे समय से न्यूरोलॉजिकल और दिल की समस्याएं भी देखी गई, इनमें सबसे अहम एनराइमा या पल्पटेशन की परेशानी अधिक देखी गई जिसमें एक मिनट में दिल की धड़कन सामान्य से कहीं अधिक देखी गई। ऐसे मरीजों को दवा व सलाह से ठीक किया गया। डॉ. वाधवा ने बताया कि तीन दिन के सम्मेलन में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दिव्यांगों के हितों को शामिल करते हुए इलाज और आधुनिक उपकरणों पर प्रकाश डाला जाएगा। सेमिनार में दस शोध पत्र भी प्रकाशित किए जाएगें। पुर्नस्थापना विभाग एम्स के विभागाध्यक्ष और आर्गेनाइजिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. संजय वाधवा ने बताया कि कोविड में सरकार द्वारा भी दिव्यांगों का पूरा ध्यान रखा गया, वैक्सीन प्राथमिकता से लेकर वैक्सीन केन्द्रों पर दिव्यांगों की सुविधाओं का ध्यान रखा गया। डॉ. वाधवा ने बताया कि पहले की अपेक्षा अब दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाना बेहद आसान है इसके लिए सरकार ने आधार की तर्ज पर यूपीआईडी सुविधा शुरू की है, और अब लर्निंग डिस्ऐबिलिटी को भी दिव्यांग की सूची में शामिल कर लिया गया है।