स्कूलों को पुनः खोलने तथा डिजिटल अंतर को खत्म करने हेतु सांसद सदस्यों को चार्टर ऑफ डिमांड्स प्रस्तुत

बच्चों के अधिकारों, बच्चों की शिक्षा तथा भारत के बच्चों के लिए एक बेहतर दुनिया की पुनः परिकल्पना करते हुए अपनी एकजुटता तथा समर्थन व्यक्त करने के लिए भारत भर में 230 से अधिक स्मारक को गोब्लू अभियान के ज़रिए नीली रोशनी से सजाया गया।

नई दिल्ली। बच्चों के द्वारा तथा बच्चों के साथ मिलकर बच्चों के अधिकारों तथा इस संदर्भ में कार्रवाई की वकालत करने के दिन यानि विश्व बाल दिवस के अवसर पर, यूनिसेफ इंडिया के साथ साझेदारी में बच्चों के लिए सांसदों का समूह (पीजीसी) ने पीजीसी अध्यक्ष माननीय श्री गौरव गोगोई तथा संयोजक – माननीय सांसद वंदना चव्हाण, माननीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल, माननीय सांसद डॉ. हिना गावित तथा माननीय सांसद ई.टी. मोहम्मद बशीर सहित 35 विशिष्ट संसद सदस्यों की गरिमापूर्ण उपस्थिति में वर्चुअल प्रारुप में ‘बच्चों की संसद (चिल्ड्रेन्स पार्लियामेंट)’ का आयोजन किया।

सत्र के वक्ताओं में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री इंदेवर पांडे, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर श्री शोम्बी शार्प तथा यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधि यासुमासा किमुरा शामिल थे। 16 राज्यों के 1500 बच्चों का प्रतिनिधित्व करने वाले 14 बच्चों ने महामारी की वजह से लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहने से अपनी पढ़ाई को होने वाले नुकसान तथा उनके सामने आने वाली चुनौतियों को साझा किया। बच्चों तथा युवाओं ने सांसदों को अपनी मांगों का एक नौ सूत्री चार्टर प्रस्तुत किया तथा उनसे अपनी पढ़ाई को जल्द शुरु करने हेतु उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया।

एक वर्ष से अधिक समय के पश्चात देश भर को स्कूलों को सुरक्षित तरीके से पुनः खोलने के साथ, चिल्ड्रन चार्टर ऑफ़ डिमांड्स स्कूलों के सुरक्षित तरीके से पुनः खोलने के साथ-साथ ऑनलाइन लर्निंग तक समान पहुंच, पाठ्यक्रम को कम करने तथा बच्चों के टीकाकरण को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित करता है। चिल्ड्रन चार्टर ऑफ़ डिमांड्स को साझा करने के पश्चात कुछ सवाल, जवाब तथा खुली चर्चा का आयोजन किया गया। चार्टर ऑफ़ डिमांड्स को प्रस्तुत करने में शामिल रही दिल्ली की 15 वर्षीय कृतिका ने कहा कि, “मुझे और मेरे दोस्तों को अपनी पढ़ाई को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आज हम उनके आभारी हैं कि सांसद हमारी मांगों को सुनने के लिए यहां आए हुए हैं।”

स्कूलों के लंबे समय तक बंद रहने से न केवल पढ़ाई बल्कि बच्चों के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है। इस दौरान, ऑनलाइन लर्निंग तक सभी की पहुंच नहीं थी। 2020 में छह राज्यों – असम, बिहार, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश में किए गए यूनिसेफ के आंकलन के अनुसार, 5-13 वर्ष की आयु के बच्चों के 76 प्रतिशत माता-पिता तथा 14-18 वर्ष के 80 प्रतिशत किशोरों ने माना कि वे इस दौरान स्कूल की तुलना में कम पढ़ पा रहे थे।

महामारी के दौरान पढाई की स्थिति[1] पर यूनिसेफ द्वारा कराये गए एक सर्वे से पता चला था कि सर्वे में शामिल 10 प्रतिशत से अधिक छात्रों के घरों या बाहर स्मार्टफोन तक पहुंच नहीं थी। यह भी पाया गया कि करीब 45 प्रतिशत बच्चे जो रिमोट लर्निंग के ज़रिए पढ़ाई नहीं कर रहे थे, वे किसी ऐसे संसाधन से पूरी तरह अनजान थे जिससे वे अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। यह पढ़ाई हेतु फिजिकल स्पेस के रुप में स्कूलों के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित करता है।

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव इंदेवर पांडेय ने अपने भाषण में कहा कि, “आज के सेशन में शामिल होने वाले बच्चों में कल का नेता बनने की संभावना नज़र आती है। वे चेंजमेकर हैं जो हमारे भविष्य को आकार देंगे। मैं दोहराना चाहूंगा कि सरकार एक ऐसी दुनिया बनाने का काम कर रही है जिसमें हर बच्चे का बचपन सुरक्षित तथा स्वस्थ हो। सरकार आपके भविष्य की सुरक्षा हेतु प्रतिबद्ध है और हम सभी यह सुनिश्चित करने का काम कर रहे हैं कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।”

भारत में संयुक्त राष्ट्र के नए रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर श्री शोम्बी शार्प ने कहा कि, “आज, हम बच्चों तथा पॉलिसीमेकर्स के साथ भारत भर के युवाओं से यह जानकर कि बेहतर आज तथा कल का निर्माण कैसे हो सकता है, विश्व बाल दिवस यानि बाल दिवस मनाने हेतु एकत्र हुए हैं। वैश्विक स्तर पर बाल अधिकारों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा संयुक्त राष्ट्र को 2030 पूर्ण एजेंडे के लिए सहयोग हेतु एसडीजी 4 (क्वालिटी एजुकेशन) हासिल करने में अपना भागीदार होने पर गर्व है।”

यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधि यासुमासा किमुरा ने कहा कि, “वैश्विक महामारी की वजह से बच्चों पर कई तरह का प्रभाव पड़ा है, जिसमें बच्चों का पोषण, टीकाकरण, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चूंकि हम अनगिनत बच्चों की स्कूली पढ़ाई में बाधा ड़ालने वाली महामारी से लगभग दो वर्षों से बाहर निकलने की उम्मीद कर रहे हैं, इसलिए अब उनकी पढ़ाई को पुनः शुरु करने हेतु ठोस योजना बनाने की आवश्यकता है।” उन्होंने आगे कहा कि, “आप सभी भागीदारी से हमें उम्मीद है कि बच्चों के सर्वोत्तम हितों का ध्यान रखते हुए तथा उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए हमें पॉलिसी में कुछ बदलाव देखने को मिलेगा।”