कोरोनिल पर बढा विवाद, सरकार के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती

हरियाणा सरकार ने पतंजिल के लाख कोरोनिल किट खरीदने की घोषणा की। इसे निशुल्क राज्य में बांटा जाना था। उससे पहले ही हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई। अब निर्णय हाईकोर्ट को लेना है।

चंडीगढ़। कुछ दिन पहले ही आयुर्वेद और एलोपैथ के बयानबाजी को पूरा देश देख चुका है। अब ताजा मामला पतंजलि के कोरेानिल को लेकर है। जिसको लेकर मामला अब हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है। हरियाणा सरकार के एक निर्णय को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वामी रामदेव की कंपनी पतंजलि ने कुछ समय पहले कोरोना के नाम पर कोरोनिल बाजार में उतारा था। इसको लेकर शुरुआत में विवाद भी हुआ। वैसे, कई लोगों ने इसे हाथोंहाथ लिया। हरियाणा सरकार ने इसे खरीदने का आदेश दिया था। हरियाणा सरकार की ओर से 2.5 करोड़ रुपये खर्च करके एक लाख कोरोनिल किट खरीदने और उसे रोगियों को मुफ्त में वितरित करने की घोषणा की गई थी।

अब इस घोषणा के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। बता दें कि फरीदाबाद निवासी युवक अभिजीत सिंह द्वारा दायर याचिका में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड द्वारा निर्मित अवैज्ञानिक कोरोनिल किट की खरीद और वितरण से हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग को रोकने के निर्देश देने की मांग की गई है।

इस याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार आखिर राज्य के करदाताओं के पैसे को बर्बाद क्यों कर रही है ? याचिकर्ता की ओर से कहा गया है कि राज्य सरकार को कोरोनिल के स्थान पर उचित वैज्ञानिक दवा और चिकित्सा उपकरण खरीदने के लिए ऐसा कदम उठाना चाहिए। साथ ही कहा गया है कि कोरोना वैक्सीन, ऑक्सीजन प्लांट, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर व सिलेंडर, एंटीबायोटिक्स, पेरासिटामोल, कफ सिरप, विटामिन-सी आदि की व्यवस्था करनी चाहिए।

अभिजीत सिंह के इस याचिका में कहा गया है कि 23 जून, 2020 को, पतंजलि ने कोरोनिल किट लॉन्च की, जिसमें दावा किया गया कि किट 100 प्रतिशत कोविड -19 रोगियों का इलाज करती है। इसके तुरंत बाद, आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को विज्ञापन बंद करने और पतंजलि द्वारा किए गए ऐसे दावों पर नोटिस भेज कर जवाब मांगा था। जब शुरुआत में ही संदेह उत्पन्न हो गया तो सरकार किस आधार पर इस प्रकार का निर्णय ले सकती है। बताया जाता है कि हाईकोर्ट जल्द ही इस मामले में सुनवाई कर सकती है।