अमृत महोत्सव कार्यक्रम में स्वतंत्रता और विभाजन की विरासत पर चर्चा

अमृत महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में हुआ। वेबिनार में वक्ताओं ने इतिहास के माध्यम से भविष्य को समझने का संकेत दिया। वक्ताओं ने चीजों को समग्रता में देखने की बात की।

नई दिल्ली। पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति से सराबोर हो रहा है। दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाल ही में आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम मनाया गया। कॉलेज के इतिहास विभाग के एसोसिएशन इतिहास ने आईक्यूएसी के सहयोग से वर्चुअल मोड में राष्ट्रीय वेबीनारों की श्रृंखला की शुरुआत की।
कॉलेज ने जे एन यू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज की प्रोफेसर डॉ. सुचेता महाजन को निमंत्रित किया। डॉ. महाजन का कॉलेज के इतिहास विभाग की टीचर इंचार्ज प्रो. अमृत कौर बसरा ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन विभाग की ही प्रथम वर्ष की छात्रा तेजस्वी सिंह ने किया।

डॉ. सुचेता महाजन ने संवादात्मक दृष्टिकोण के साथ स्वतंत्रता और विभाजन की विरासत पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमें आज़ादी के साथ साथ बटवारे को भी याद रख उसकी समीक्षा करनी होगी। उनका कहना था कि देश के बंटवारे के जो मुख्य कारक थे, उसके बीज स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में ही बोए जा चुके थे इसलिए उनके साझा कारणों पर विचार किया जाना महत्त्वपूर्ण है। अगर इनपर विचार नहीं किया जाता है तो इसका अर्थ यह होगा कि हम आज़ादी के आंदोलन में किए संघर्ष का सही मूल्यांकन नहीं कर रहे हैं। डॉ. महाजन ने स्वतंत्रता के बाद भारत को विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि इसी से हम आर्थिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ सके। उन्होंने नेहरू और पटेल की भारत को नॉन अलाइंड बनाने की पॉलिसी का भी समर्थन किया। इसके अलावा उन्होंने देश के सांस्कृतिक, धार्मिक भिन्नताओं और विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं, जैसे सांप्रदायिक दंगों का विस्तार से उल्लेख किया।
कार्यक्रम का समापन आईक्यूएसी के कन्वीनर, श्री श्रीकांत पांडेय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह वेबीनार वास्तव में प्रतिभागियों के लिए एक उपयोगी सत्र था क्योंकि इससे उन्हें स्वतंत्रता और विभाजन के विभिन्न पहलुओं के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला।