Positive Energy के लिए 10 एनर्जी बूस्टर लाइफ में अपनाएं, बदल जाएगी आपकी किस्मत

सफलता के लिए मेहनत के साथ-साथ आपको लाइफ में पॉजिटिव एनर्जी का होना भी जरूरी है। यही सकरात्मकता ही आपको आगे बढ़ने की हिम्मत देगी। या यूं कहें कि सफलता की सीढ़ी है पॉजिटिव एनर्जी। यह माहौल के अलावा अन्न यानी भोजन से भी आती है। तभी कहा गया है कि जैसा होगा अन्न, वैसा होगा मन।

नई दिल्ली। पॉजिटिव एनर्जी को सफलता की लाइफलाइन कहना गलत नहीं होगा। इसके लिए आपको जिंदगी में बहुत कुछ करना होगा। करने का मतलब यह नहीं है कि हम आपको कुछ गलत काम करने को कह रहे हैं। बस, कह रहे हैं कि जिंदगी में पॉजिटिव एनर्जी का समावेश करें। जब आपके आस-पास गुडी-गुडी काम करने का माहौल होगा तो सफलता आपके पास आएगी। हां, मेहनत करना नहीं भूलिए।

1 सुबह की लें एनर्जी

सूर्य को ऊर्जा का स्रोत कहा गया है। अतः सूर्योदय से पूर्व उठने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। हमारी ऋषि-परंपरा इस बात पर जोर देती रही है कि भोर-बेला में ही यानी सूर्योदय-पूर्व बिस्तर छोड़ देना चाहिए और दैनंदिन के कार्यों में लग जाना चाहिए। इससे तन-मन और मस्तिष्क को भरपूर ऊर्जा और शांति मिलती है।

2 श्वासों पर ध्यान

सुबह सवेरे उठकर खुले स्थान पार्क अथवा भवन की छत पर पूर्वाभिमुख होकर सूर्य नमस्कार एवं अन्य व्यायाम करें। लंबी-लंबी श्वास खींचते हुए मन में विचार करें कि सृष्टि की अपार सकारात्मक ऊर्जा आपकी श्वास में घुलकर तन-मन और मस्तिष्क को स्वस्थ और सुंदर बना रही है।

3 खान-पान पर ध्यान

हमारे शरीर में ऊर्जा भोजन से ही प्राप्त होता है, इसलिए खान-पान का विशेष ध्यान रखें साथ ही साथ वास्तु के अनुकुल नियमों का पालन करें ।

4 भोजन और दिशाएं

अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस बात का ध्यान रखें कि भोजन करते समय मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर रहे। पश्चिम दिशा की ओर मुख रखना तीसरा विकल्प हो सकता है, किंतु दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन न करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से न ही भोजन का आनंद मिलेगा और न ही स्वास्थ्य लाभ ही होगा ।

5 बैठकर खाएं खाना

खड़े होकर अथवा बेड या पलंग पर बैठकर भोजन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से कदापि उचित नहीं है। भूमि पर आसन बिछाकर भोजन करना सर्वाधिक उपयोगी है। आधुनिक जीवन शैली के अनुसार, डाइनिंग टेबल पर भी भोजन करना बेहतर है।

6 बेड पर खाना-पीना नहीं

बेड पर बैठकर भोजन करने से जूठन आदि गिरने से न केवल चींटी जैसे कीटों को अनायास ही निमंत्रण मिल जाता है, इससे निद्रा में भी व्यवधान उत्पन्न होता है। दूसरी एक महत्वपूर्ण बात यह है कि दिन-भर के थके-हारे जब आप बेड पर जाते हैं तो वह आपसे स्वच्छता की मांग करता है ताकि मन को शांति मिल सके। मनोवैज्ञानिक तौर पर साफ-धुली हुई चादर आपकी नींद को ज्यादा आराम देती है।

7 शांत चित्त है जरूरी

भोजन के समय शांत चित्त रहें। चाहे जिस प्रकार का भी भोजन आपके समक्ष हो, अन्न देवता का धन्यवाद करते हुए उसे रुचिपूर्वक अच्छी तरह से चबाते हुए आनंद पूर्वक ग्रहण करें।

8 रेडिएशंस से दूरी

प्रायः टेलीविजन देखते हुए भोजन करने का प्रचलन हो गया है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वथा हानिकारक है । टीवी देखते हुए भोजन करने से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशंस नामक नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो सभी ज्ञानेंद्रियों पर विपरीत प्रभाव डालती है। इसके अलावा टीवी पर क्षण-प्रतिक्षण मर्डर, घृणा, बलात्कार, दुर्घटना, झगड़ा और मारपीट जैसे विभिन्न दृश्य दिखाए जाते हैं, जिनसे मन-मस्तिष्क भी निरंतर विपरीत भावनाओं से भर जाते हैं। इससे मानसिक अस्थिरता पैदा होती है।

9 गपशप और भोजन

शरीर क्रिया विज्ञान के अनुसार, शरीर के भीतर उत्पन्न हुए विभिन्न रस, लार, एसिड और पित्त आदि अनियमित अनुपात में भोजन में मिलने से पाचन क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और पेट की विभिन्न बीमारियां जन्म ले लेती हैं, अतः टीवी ऑफ करके अपनी दिनचर्या पर या घरेलू गपशप करते हुए परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर भोजन करना
उचित रहता है।

10 वास्तु और दवाई

यदि हम अस्वस्थ होते हैं तो स्वस्थ होने के लिए हमें औषधि अर्थात दवाई का प्रयोग करना पड़ता है । वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि –

।। उत्तरे इशानयोर्मध्ये ओषधार्थं तु कारयेत् ।।
अर्थात उत्तर और ईशानकोण के मध्य में औषधि को रखना और फिर उसे प्रयोग में लाना उचित है, लेकिन आज के परिवेश में प्रायः परिवार के सदस्य अपनी दवाइयां डाइनिंग टेबल पर रखने शुरू कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसा करना नकारात्मक श्रेणी में आता है। ऐसा करके हम चाहे-अनचाहे दवाइयों को भोजन का ही अंग बना देते हैं, ऐसा कदापि न करें। आप जब भी दवाई को सामने देखते हैं तो आप बीमारी की कल्पना करने लगते हैं, जो गलत प्रभाव पैदा करता है।