लड़कियों को है हिजाब पहनने का हक, स्कूल गेट पर नहीं रोका जा सकता : जस्टिस धूलिया

जस्टिस धूलिया ने कहा कि कर्नाटक में स्कूलों और कॉलेजों में कहीं भी हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया ने गुरुवार को घोषित किया कि एक लड़की को अपने घर या बाहर हिजाब पहनने का अधिकार है, और यह अधिकार उसके स्कूल के गेट पर नहीं रुकता है।

उन्होंने कहा कि “ अपनी गरिमा और अपनी निजता का पालन करता है, तब भी जब वह स्कूल के गेट के अंदर, अपनी कक्षा में होता है। वह अपने मौलिक अधिकारों को बरकरार रखती है। यह कहना कि ये अधिकार कक्षा के भीतर व्युत्पन्न अधिकार बन जाते हैं, पूरी तरह गलत है।“

अपने फैसले में, जस्टिस धूलिया ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च के फैसले के खिलाफ अपील की अनुमति दी थी, जिसमें सरकार के प्री यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कक्षाओं में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकरार रखा गया था।

जस्टिस धूलिया ने कहा कि याचिकाकर्ता (छात्राएं) हिजाब पहनना चाहती हैं! क्या लोकतंत्र में यह भी नहीं करने की छूट नहीं है? यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य या यहां तक कि शालीनता या संविधान के भाग III के किसी अन्य प्रावधान के खिलाफ कैसे है? उच्च न्यायालय के फैसले में इन सवालों का पर्याप्त जवाब नहीं दिया गया है।