Good News : जरूरतमंदों को घरों में लगेगी अब कोविड वैक्सीन

जो लाचार हैं। शारीरिक रूप से असमर्थ हैं। अब तक कोविड वैक्सीन नहीं लिया है, तो उन्हें अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने ऐलान कर दिया है। अब उन्हें उनके घर पर ही कोरोना का टीका लगाया जाएगा।

नई दिल्ली। कोरेना के खिलाफ भारत की सक्रियता को इससे समझा जा सकता है कि देश में 17 सितंबर को करीब ढाई करोड़ लोगों को एक ही दिन में कोविड वैक्सीन दी गई। 23 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत में वयस्कों की कुल आबादी का दो-तिहाई वयस्कों को कोविड वैक्सीन लगा दिया गया है। यह एक ऐतिहासिक आंकड़ा है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को कोविड नियमों का पालन करते हुए वैक्सीन उनके घरों में ही लगाया जाएगा।

नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य मंत्रालय के संवाददाता सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है कि देश के दो तिहाई वयस्कों को कोविड वैक्सीन लगा दिया गया है। डॉ पॉल ने कहा कि जो लोग गंभीर रूप से बीमार हैं या विकलांगता आदि के शिकार हैं। यदि वो टीकाकरण केंद्र तक जाने में असमर्थ हैं, तो अब सरकार उनको घरों में ही कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि भारत सरकार को कोविड टीकाकरण में आत्मविश्वास आया होगा।

इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि 22 सितंबर को ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच इसको लेकर बात हो गई है। जो भी लोग अपनी शारीरिक अवसस्था के कारण टीकाकरण केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं, उनको अब घर में ही कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। इसके पीछे सरकार की मंशा केवल और केवल सभी को कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने यह भी बताया कि कोविड सक्रिय मामलों की संख्या घटी है। इस वक़्त देश में 3,01,000 सक्रिय मामले हैं। रिकवरी दर 97.8% है, यह दर लगातार बढ़ रही है। इस वक़्त 1 लाख से ज़्यादा कोविड सक्रिय मामले केरल में हैं, 40,000 से ज़्यादा मामले महाराष्ट्र में है। 10,000 और 17,000 के बीच में जो कोविड सक्रिय मामले हैं वह चार राज्यों में हैं(कर्नाटक, मिज़ोरम, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) बाकी 30 राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों में 10,000 से कम सक्रिय मामले हैं। कोविड वैक्सीन की पहली डोज़ अब तक लगभग 62 करोड़ लोगों को मिल गई, दूसरी डोज़ साढ़े 21 करोड़ लोगों को मिली है। 99% स्वास्थ्यकर्मियों को पहली डोज़ और 84% को दूसरी डोज़ मिली है। फ्रंटलाइन वर्कर्स में पहली डोज़ 100% और 80% लोगों को दूसरी डोज़ मिली।