Namaste : गर मिले अभी किसी से, तो तपाक से गले नहीं मिलना

कोरोना काल में अभिवादन के भारतीय तरीके को पूरे विश्व ने अपनाया है। दूसरे देशों की सभ्यताओं में गले लगाकर, हाथ मिलाकर आदि तरीके से अभिभावदन करने का चलन था। वहीं, हमारी सनातन संस्कृति में हाथ जोडकर प्रणाम करने का चलन रहा है।

नई दिल्ली। मंगलवार को देशभर में कोरोना के 86 लाख मामले देखे गए। मई के पहले हफ्ते में जहां रोजाना चार लाख से अधिक मरीज देखे जा रहे थे वहां संक्रमितों का आंकड़ा एक साल से कम में सिमटना राहत भरी खबर है। कोरोना संक्रमण के संदर्भ में बीते साल का पैटर्न जरूरी देखें, अचानक केस कम होने के बाद मार्च महीने के अंत में तेजी से संक्रमण का ग्राफ बढ़ गया। इस बीच लोगों ने कोविड अनुरूप व्यवहार का सही से पालन किया होता तो शायद स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। इसलिए बीते साल की गलतियों को इस बात नहीं दोहराना है।

लंबे समय के लॉकडाउन के बाद लोग अपनों से मिलने की योजना बनाने लगे हैं। समूह के बीच खुशी का जश्न मनाने की बात ही अलग होती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हमें अभी कुछ दिन और सतर्क रहना है। दोस्त या अपनों से मिलने पर हाथ या गले नहीं मिलना है, दूर से अभिवादन करें और निर्धारित छह फीट की दूरी का पालन भी करें। जरूरी नहीं है तो अभी गेट टू गेदर न करें, फोन पर या फिर वर्चुअल मीटिंग करें। बहुत ही जगहों पर मिलने की जरूरत को टाला जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहली लहर के समय जब लोग वैलेंटाइन और होली मनाने में व्यस्त थे, विदेशों में नए म्यूटेंट का कहर शुरू हो गया था। मार्च महीने के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र में म्यूडेड वैरिएंट के 400 नये मरीज देखे गए। जिसके बाद तेजी से प्रकोप बढ़ा और मई महीने तक चार लाख से अधिक पॉजिटिव केस देखे जाने लगे। इस समय हम पहली और दूसरी लगह के बीच की स्थिति में है, यही वह समय है जबकि कोविड अनुरूप व्यवहार का सही से पालन कर कोविड की संभावित तीसरी लहर को रोका जा सकता है।

बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें मास्क का प्रयोग करें, लगातार हाथ धोते रहें और निर्धारित दूरी का पालन करें। कोविड अनुरूप व्यवहार को आदत में शामिल करें, यह आदत अन्य कई तरह के वायरस संक्रमण से भी सुरक्षित रखेगा। कोविड से बचाव के लिए अच्छी स्वस्थ आदतों को जीवन में अपनाना जरूरी है। जिससे हम खुद को अपनों को संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं।