परमाणु परीक्षण विरोधी अंतर्राष्ट्रीय दिवस: जानिए क्या है इसका महत्व और इतिहास

इसमें यह संकल्प किया गया  कि परमाणु परीक्षणों को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए ताकि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर विनाशकारी और हानिकारक प्रभावों को रोका जा सके

परमाणु परीक्षण के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 29 अगस्त 1991 को कजाकिस्तान में सेमिपालाटिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल को बंद करने की याद दिलाने के उद्देश्य से मनाया जाता  है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र , सदस्य राज्यों, अंतर सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा नेटवर्क और एक सुरक्षित विश्व प्राप्त करने की दिशा में एक मूल्यवान कदम के रूप में परमाणु हथियार परीक्षणों को समाप्त करने की आवश्यकता को सूचित करने, शिक्षित करने और वकालत करने के लिए मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 64वें सत्र में 2 दिसंबर 2009 को  संकल्प 64/35 को सर्वसम्मति से 29 अगस्त को परमाणु परीक्षण के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने के लिए घोषित किया किया गया था।

इसमें यह संकल्प किया गया  कि परमाणु परीक्षणों को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए ताकि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर विनाशकारी और हानिकारक प्रभावों को रोका जा सके और परमाणु हथियार मुक्त दुनिया के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

परमाणु हथियार की यात्रा

  • पहला परमाणु परीक्षण, जिसे ट्रिनिटी कहा जाता है, 16 जुलाई, 1945 को न्यू मैक्सिको के एक रेगिस्तानी स्थल में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना द्वारा आयोजित किया गया था।
  • इस परीक्षण ने अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के लिए अमेरिका को प्रेरित किया।  अनुमानित 200,000 लोग हताहत हुए जबकि बचे हुए लोग विकिरण-प्रेरित कैंसर से पीड़ित थे।
  • साल 1945 से 1996 के बीच कुल 2000 से अधिक परमाणु परीक्षण विस्फोट किए गए हैं।

इस दिवस का महत्व:-

 यह दिवस किसी भी देश द्वारा सभी प्रकार के परमाणु हथियारों के परीक्षण और इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की तात्कालिकता पर प्रकाश डालता है। परमाणु हथियार संधि के हस्ताक्षरकर्ताओं ने परमाणु हथियारों से उत्पन्न खतरों से  दुनिया को बचाकर  शांति स्थापित करने  और सुरक्षित रखने का संकल्प लिया है।