Jharkhand News : झारखंड के गैर भाजपाई दलों की अहम बैठक में महंगाई, किसान आंदोलन पर फैसला

सरकार द्वारा तीन किसान विरोधी कानून को निरस्त करने को लेकर किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आगामी 27 सितम्बर को भारत बंद को झारखण्ड में पूर्णरूपेण सफल करना है।बढ़ती मुद्रस्फीति और महंगाई देश की जनता की रोजी -रोटी बरबाद कर रही है।

रांची। झारखंड के गैर भाजपाई दलों की एक अहम बैठक सोमवार को कांग्रेस भवन में हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ कि 27 सितम्बर को भारत बंदी का समर्थन करते हुए सभी गैर भाजपाई दल सड़कों पर उतरेंगे। सभी गैर भाजपाई दलों एक समन्वय जिला स्तर पर बनाकर 29 सितम्बर को जिला मुख्यालयों में धरना देगें तथा राजभवन के समक्ष आहूत विशाल धरना में सभी दल भाग लेंगे।
वक्ताओं ने बैठक में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था का वर्तमान स्थिति, राष्ट्रीय सम्पति की बड़ी लूट के साथ राष्ट्रीय संपत्ति की लूट बैंकों और वित्तीय सेवाओं सहित सार्वजनिक क्षेत्र का बड़े पैमाने पर निजीकरण; हमारे खनिज संसाधनों और सार्वजनिक उपयोगिताओं का निजीकरण प्रधान मंत्री के चुनिन्दा साथियों को लाभान्वित करने के लिए किया जा रहा है। दलितों, आदिवासियों और महिलाओं पर हमले तेजी से बढ़े हैं। यह देश में सामाजिक न्याय की ओर बढ़ने की संवैधानिक अनिवार्यता को पूरी तरह से नकार देता है। इन्हीं विषयों को लेकर अगामी 26 सितम्बर को जन जागरण अभियान चलाते हुए राजधानी में मशाल जुलूस निकाला जायेगा। हमारे किसानों द्वारा एतिहासिक संघर्ष नौ माह से जारी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर की अध्यक्षता में सोमवार को कांग्रेस भवन में संपन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर 19 विपक्षी दलों के नेताओं के बीच 20 अगस्त 2021 को एक वर्चुवल बैठक हुई थी, जिसमें केन्द्र सरकार और सत्ताधारी दल ने जिस प्रकार से पेगासस सैन्य निगरानी स्पाईवेयर का अवैध उपयोग, किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने, कोविड-19 महामारी का घोर कुप्रबंधन, बढ़ती मुद्रास्फीति एवं मंहगाई के साथ-साथ बढ़ती बेरोजगारी पर चर्चा करने या जवाब देने से इंकार किया है। हम इसकी कड़ी निन्दा करते हैं। इन सभी मुद्दों के अलावा देश और आम जनता को प्रभावित करने वाले कई अन्य मुद्दों को सत्ताधारी सरकार द्वारा जानबूझकर अनदेखा किया गया था।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्री महासचिव विनोद पांडे ने कहा कि संसद में अभूतपूर्व दृश्य देखे गए। जहां विपक्षी विरोध को बाधित करने के लिए तैनात मार्शलों द्वारा महिला सांसदों सहित सांसदों को घायल कर दिया गया। विपक्ष को देश और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के उनके अधिकार से वंचित करने के अलावा, सरकार ने संसद के दोनों सदनों को संभालने के कारण हुए व्यवधान के शोर के माध्यम से कानूनों को कुचलने का काम किया है। केन्द्र सरकार के घोर कुप्रबंधन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था का विनाश, गहरी मंदी के साथ हमारे करोड़ों युवाओं को बेरोजगारी की ओर ढकेल रहा है। तथा गरीबी तथा भूख को बढ़ा रहा है।
सीपीआई के राज्य सचिव भुवनेश्वर मेहता ने कहा कि संसद में सरकार देश के ज्वलंत मुद्दों पर न तो चर्चा करती है और न ही सरकार के पास जीवन और अजीविका सुरक्षित करने का कोई समाधान है। उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोलियम और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में अभूतपूर्व वृद्धि को वापस ले। रसोई गैस और आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से खाना पकाने के तेल की कीमतों को कम करे और तेजी से बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करें।
बैठक में राजद के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के फिलमोन टोप्पो, मासस के सुशान्तो मुखर्जी, सीपीआईएमएल से जानर्दन प्रसाद, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जलेश्वर महतो, शहजादा अनवर, मुख्य रूप से उपस्थित हुए। बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने दी।
बैठक में मुख्यरूप से कार्यालय प्रभारी अमुल्य नीरज खलखो, प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, सतीश पाॅल मुंजनी, आभा सिन्हा, राकेश किरण महतो, सीपीआई से अजय सिंह, टीएमसी से संजय कुमार पांडे, दयानन्द प्रसाद सहित कई उपस्थित थे।