गौरी लंकेश मर्डर केस में कर्नाटक हाई कोर्ट ने मुख्य आरोपियों की ज़मानत याचिका की खारिज

ऋषिकेश देवदीकर ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने 9 जनवरी, 2020 को उनकी गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दायर नहीं किया था।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गौरी लंकेश हत्याकांड के एक प्रमुख आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने में देरी की है।

बता दें कि 5 सितंबर, 2017 को अपने घर के बाहर 55 वर्षीय पत्रकार की हत्या के कथित मास्टरमाइंडों में से एक, 41 वर्षीय हृषिकेश देवदिकर ने इस साल कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और  जमानत पर रिहा होने के अधिकार का दावा किया था।

जिसके बाद उच्च न्यायालय ने 21 अक्टूबर को फैसला सुनाया कि देवदीकर जमानत के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत राहत की मांग नहीं कर सकते क्योंकि एसआईटी ने उनकी गिरफ्तारी से पहले ही उनके खिलाफ आरोप दायर कर दिया था और जांच एजेंसी ने अवधि बढ़ाने की मांग की थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि एसआईटी ने देवदीकर के खिलाफ एजेंसी को ऐसा करने के लिए दिए गए 180 दिनों से एक महीने पहले एक एक्स्ट्रा चार्ज शीट दायर की थी।

बता दें कि लंकेश की हत्या के सिलसिले में नवंबर 2018 में एसआईटी द्वारा दायर की गई चार्जशीट में देवदीकर को आरोपी के रूप में शामिल किया गया था। देवदीकर पर आरोप है कि वह प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था और कथित तौर पर हत्यारों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बंदूकें उपलब्ध कराता था। वहीं एसआईटी ने जनवरी 2020 में कहा था कि, “वह मुख्य रूप से लंकेश की हत्या की साजिश में शामिल था।“