कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ याचिका की खारिज

राज्य के पीएफआई नेता ने केंद्र के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध को बरकरार रखा और प्रतिबंध पर केंद्र की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। राज्य के पीएफआई नेता ने केंद्र के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने नासिर पाशा नाम के एक पीएफआई कार्यकर्ता द्वारा उसकी पत्नी के माध्यम से दायर याचिका पर आदेश सुनाया। बता दें कि पाशा फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

सोमवार को हाईकोर्ट ने मामले में सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिका में कहा गया था कि 2007-08 में, पीएफआई को कर्नाटक सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया था और यह समाज के दलित वर्ग के सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा था।

सितंबर में, केंद्र ने पीएफआई को एक ‘गैरकानूनी संघ’ घोषित किया और अगले पांच वर्षों के लिए इसे प्रतिबंधित कर दिया, साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को संगठन के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की शक्तियों का “प्रयोग” करने का निर्देश दिया।

NIA, प्रवर्तन निदेशालय और राज्य एजेंसियों के साथ-साथ पुलिस बलों द्वारा देश भर में किए गए कई छापों में 100 से अधिक PFI कैडरों को गिरफ्तार किया गया था, जो इस्लामिक स्टेट जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ PFI के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के कई उदाहरणों के निष्कर्षों पर आधारित थे।