जानिए क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड रेबीज डे और क्या है इस दिन का महत्त्व ?  

भारत में रेबीज के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। दुनिया में रेबीज के 36 फ़ीसदी मामले भारत के होते हैं।

रेबीज के बारे में जागरूकता पैदा करने और लोगों को इस घातक बीमारी से बचाने के लिए हर साल 28 सितंबर को दुनियाभर में रेबीज दिवस मनाया जाता है। यह दिन फ्रांसीसी रसायनज्ञ और सूक्ष्म जीवविज्ञानी लुई पाश्चर की पुण्यतिथि का प्रतीक है। जिन्होंने 1885 में पहली रेबीज वैक्सीन विकसित की थी। आज यह वैक्सीन जानवरों और इंसानों के लिए अहम भूमिका निभा रही है। इसके इस्तेमाल से इंसानों में रेबीज के खतरे को कम किया जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार लस्सा वायरस से संक्रमित जानवर के काटने से मनुष्य में रेबीज का संक्रमण होता है। यह एक जिनोटेक बीमारी है, जो संक्रमित बिल्लियों, कुत्तों और बंदरों के काटने से इंसानों में फैल सकती है। इससे मस्तिष्क में सूजन भी हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि रेबीज के 99% मामले कुत्तों से इंसानों में फैलते हैं जिसे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ जाती है। भारत में रेबीज के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। दुनिया में रेबीज के 36 फ़ीसदी मामले भारत के होते हैं। रेबीज दिवस हर साल एक नई टीम के साथ मनाया जाता है। और इस साल की थीम रेबीज वन हेल्थ  जीरो डेथ्स। यह विषय मनुष्य और जानवरों के बीच संबंधों को बढ़ाने के बारे में है।