आरक्षण पर विपक्ष का दुष्प्रचार और संघ प्रमुख की दो टूक राय

 

कृष्णमोहन झा

परम वैभव संपन्न राष्ट्र के निर्माण हेतु समर्पित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर यूं तो अनेक आरोप लगते रहे हैं परंतु संघ ने कभी भी आरोप प्रत्यारोप की राजनीति को अपनी कार्यशैली का हिस्सा नहीं बनाया। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि संघ ने हमेशा ही अपने काम से काम की नीति का अनुसरण किया है लेकिन जब कभी संघ के बारे में सुनियोजित तरीके से भ्रांतियां फैलाकर समाज के सर्वांगीण विकास को बाधित करने की कोशिशें की जाती हैं तो संघ को उनका दृढ़ता पूर्वक खंडन करने के लिए आगे आना ही पड़ता है । आरक्षण के मुद्दे को लेकर भी संघ के विरुद्ध वर्षों से दुष्प्रचार का सिलसिला जारी है। वर्तमान लोकसभा चुनावों में भी विरोधी दल आरक्षण को लेकर संघ के विरुद्ध यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि संघ आरक्षण का विरोधी है और वह आजादी के बाद से ही समाज के कुछ वर्गों को दिए जा रहे आरक्षण को समाप्त करने का पक्षधर हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विगत दिनों हैदराबाद में आयोजित एक समारोह में इस मुद्दे पर खुलकर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जबसे आरक्षण अस्तित्व में आया है, संघ ने संविधान सम्मत आरक्षण का पूरी तरह समर्थन किया है। भागवत ने स्पष्ट कहा “संघ का कहना है कि आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कि लोग, जिन्हें यह दिया गया है, यह महसूस करें कि उन्हें इसकी आवश्यकता है।”

संघ प्रमुख ने यहां विद्या भारती विज्ञान केन्द्र के उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो का भी जिसमें संघ के आरक्षण विरोधी होने का दावा किया गया है। संघ प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि कथित वीडियो में उन्हें इस मुद्दे पर संघ की जिस बैठक को संबोधित करते हुए दिखाया गया है वैसी कोई बैठक हुई ही नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि प्रौद्योगिकी और आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वह भी दिखाया जा सकता है जो हुआ ही नहीं है। इस मामले में भी ऐसा ही किया गया है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा की प्रत्यक्ष बढ़त ने विरोधी दलों को अपनी चुनावी संभावनाएं धूमिल पड़ने की चिंता सताने लगी है इसलिए विरोधी दलों ने अब आरक्षण का मुद्दा भी उछालना शुरू कर दिया है और इसी अभियान के तहत संघ को आरक्षण विरोधी बताया जा रहा है। भागवत ने इस तरह के आरोपों को गत दिवस हैदराबाद में दिए गए भाषण में पूरी तरह से निराधार, ग़लत और असत्य बताकर खारिज किया है।

ऐसा नहीं है कि संघ प्रमुख ने समाज के वंचित तबके के लोगों के लिए आरक्षण जारी रखने का पहली बार पुरजोर समर्थन किया है। अतीत में भी अनेक अवसर पर मोहन भागवत ने आरक्षण पर संघ का साफ सुथरा नजरिया देश के सामने रखा है और संघ के इस साफ सुथरे नजरिए पर भी सवाल हमेशा ही केवल उन विरोधी दलों के द्वारा उठाए गए हैं जो केंद्र की मोदी सरकार की लोकप्रियता से परेशान हैं‌ और चुनावों के दौरान विरोधी दलों का यह अभियान और तेज हो जाता है।जो विरोधी दल आरक्षण को लेकर संघ पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें संघ प्रमुख मोहन भागवत के गत वर्ष सितंबर में दिये गये उस बयान पर अवश्य ही गंभीरता से मनन करना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि ” समाज में भेदभाव मौजूद है भले ही हम इसे देख न सकें। समाज के जो वर्ग 2000 साल तक भेदभाव से पीड़ित रहे उन्हें समानता का अधिकार दिलाने के लिए हम जैसे लोगों को दो सौ साल तक कुछ परेशानी क्यों नहीं झेलनी चाहिए।” यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2018 में
नई दिल्ली में संघ द्वारा आयोजित “भविष्य का भारत” व्याख्यान माला में भी मोहन भागवत ने आरक्षण का यही दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था। आरक्षण के मुद्दे पर संघ प्रमुख द्वारा विभिन्न अवसरों पर दिए बयानों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि आरक्षण के बारे में संघ के दृष्टिकोण में कभी किंचित मात्र भी बदलाव नहीं आया है। निश्चित रूप से यह समाज के उपेक्षित और वंचित तबके के लोगों के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक भी है और इस संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करने के बजाय उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)