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किसानों आंदोलन को लेकर राज्यसभा स्थगित, विपक्षी सांसदों ने कहा कि नहीं चलने देंगे सदन

आज 2 फरवरी को जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने सरकार से नए कृषि कानून पर चर्चा कराने की मांग की। हो-हल्ला देखकर पहले दो बार कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित की गई।

नई दिल्ली। किसान आंदोलन की धमक केवल सडक पर ही नहीं, बल्कि संसद में भी पहुंच चुकी है। 1 फरवरी को बजट वाले दिन भी विपक्षी सदस्यों ने सदन में इस मुद्दे को उठाया। आज 2 फरवरी को जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने सरकार से नए कृषि कानून पर चर्चा कराने की मांग की। हो-हल्ला देखकर पहले दो बार कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित की गई। उसके बाद भी विपक्षी सांसदों के रूख में बदलाव नहीं आया, तो राज्यसभा की कार्यवाही कल सुबह 9 बजे तक के लिए ​स्थगित हुई।

इससे पहले राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने कहा था कि किसानों के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा आज नहीं, कल होगी। लेकिन, विपक्षी सांसद सबसे पहले किसान के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा की मांग कर रहे थे।

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 8 महीने बाद हमारे अन्नदाता द्वारा 80 दिन सर्दी व अन्य दुष्प्रभाव सहने के बाद हम आवाज उठाने के लिए गणतंत्र के मंदिर में सम्मिलित होते हैं। लेकिन सरकार अन्नदाता के मुद्दे को प्राथमिकता नहीं मानती। तो फिर सरकार किसे प्राथमिकता मानती है?

वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का कहना है कि सदन में सबसे पहले तीनों काले कानून वापस लेने पर चर्चा होनी चाहिए। यहां अगर हम किसान के मुद्दे नहीं उठा सकते तो सदन चलाने का मतलब क्या है ?

दूसरी ओर एनसीपी के नेता नवाब मलिक ने भी कहा कि कल जब बजट पेश हुआ तो लोगों के मन में सवाल खड़ा हुआ कि ये देश का बजट है या भाजपा का घोषणा पत्र।​ जिन राज्यों में चुनाव है वहां योजनाओं का ऐलान किया गया। भाजपा की राजनीति चुनावी राजनीति है, सरकार का उपयोग चुनाव के लिए किया जाता है। इससे दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता।

 

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