रिसर्च में आया सामने, गर्मी के महीनों में बढ़ सकता है गर्भपात का खतरा

वहीं अब, बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (बीएसपीएच) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि गर्मी के महीनों में गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।

एक रिसर्च में सामने आया है कि कुल गर्भधारण के आंकड़ों में से 30 प्रतिशत गर्भ गर्भपात के शिकार हो जाते हैं। आधे से अधिक गर्भपात होने के पीछे की वज़ह- पोस्टट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, अवसाद और चिंता है।

वहीं अब, बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (बीएसपीएच) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि गर्मी के महीनों में गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।

बता दें कि जर्नल एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुए इस अध्ययन ने गर्भपात के जोखिम में मौसम के अंतर का अध्ययन किया और पाया कि उत्तरी अमेरिका में गर्भवती लोगों में गर्मियों के महीनों में प्रारंभिक गर्भपात (गर्भावस्था के आठ सप्ताह के भीतर) का 44 प्रतिशत अधिक जोखिम सामने आया है। वहीं भौगोलिक रूप से देखे गए परिणामों से पता चला है कि दक्षिण और मध्यपश्चिम में ग्रीष्मकाल के सबसे गर्म महीनों अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में इस नुकसान का खतरा ज्यादा रहता है।

इन परिणामों केi मानें तो गर्भावस्था के नुकसान में अधिक गर्मी और अन्य गर्म-मौसम पर्यावरण या जीवन शैली के खतरे की संभावित भूमिकाओं को समझने के लिए और रिसर्च की आवश्यकता है।

वहीं इस बारे में बुस्फ में महामारी विज्ञान की रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमेलिया वेसेलिंक का कहना है कि जब भी आप किसी परिणाम में मौसमी बदलाव देखते हैं, तो यह आपको उस परिणाम के कारणों के बारे में संकेत दे सकता है।  हमने पाया कि गर्भपात का जोखिम, विशेष रूप से गर्भावस्था के आठ सप्ताह से पहले ‘शुरुआती’ गर्भपात का जोखिम गर्मियों में सबसे अधिक था।  अब हमें यह समझने के लिए और अधिक रिसर्च करने की जरूरत है कि गर्मियों में किस प्रकार के एक्सपोजर अधिक प्रचलित हैं, और इनमें से कौन सा एक्सपोजर गर्भपात के बढ़ते जोखिम को समझा सकता है।”

वहीं एक और परिकल्पना यह सामने आई है कि गर्मियों में गर्भपात के जोखिम में वृद्धि गर्मी का कारण गर्मी के संपर्क में आना है। वेसेलिंक के अनुसार “कुछ अध्ययनों ने गर्मी और गर्भपात के जोखिम के बीच संबंध की जांच भी की है, इसलिए यह निश्चित रूप से एक ऐसा विषय है जो आगे की खोज की गारंटी देता है,”  हालांकि, शोधकर्ताओं का तर्क है कि गर्भावस्था के दौरान गर्मी के जोखिम से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने के लिए चिकित्सक, नीति निर्माता और जलवायु विशेषज्ञ पहले से ही कार्रवाई कर सकते हैं।