RSS प्रमुख ने कहा, “धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता”

मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण नीति के समर्थन में, कोसोवो और दक्षिण सूडान को नए देशों के उदाहरण के रूप में बताया जो “असंतुलन के कारण” उभरे हैं।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज कहा कि भारत को जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक ऐसी नीति की जरूरत है जो “समान रूप से सभी पर लागू हो”, साथ ही उन्होंने देश के टूटने के खतरे को बढ़ाने के लिए “धर्म-आधारित असंतुलन” और “जबरन धर्मांतरण” का हवाला दिया। वहीं उन्होंने पूर्वी तिमोर, कोसोवो और दक्षिण सूडान को “धार्मिक समुदाय-आधारित असंतुलन के कारण उभरे नए देशों” के उदाहरण के रूप में पेश किया।

वह इस दौरान भाजपा के साथी संगठन आरएसएस की वार्षिक दशहरा रैली को संबोधित कर रहे थे।
हिंदुत्व संगठन द्वारा एक आउटरीच के रूप में देखे जाने वाले कुछ मुस्लिम नेताओं से मुलाकात के कुछ ही हफ्ते बाद आज उन्होंने अपने भाषण में कहा कि “जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ, धार्मिक आधार पर संतुलन भी महत्वपूर्ण है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।“

वहीं उन्होंने कहा कि प्रसव संबंधी किसी भी नीति में महिलाओं के स्वास्थ्य को निश्चित तौर पर ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही बता दें कि आज की दशहरा रैली भी पहली ऐसी रैली थी जब आरएसएस ने एक महिला को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया हो। आज की रैली में मुख्य अतिथि की भुमिका के रूप में माउंटेनर संतोष यादव थीं।