यौन शोषण का मुद्दा फिर छाया..

कोर्ट के अनुसार भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं । सह प्रमुख और महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ भी आरोप तय होंगे !

नई दिल्ली। महिला पहलवानों द्वारा भाजपा सांसद व भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Court) द्वारा आरोप तय करने के आदेश दिये जाने से महिला पहलवानों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है और वह भी तब जब दिल्ली, हरियाणा व पंजाब में अभी मतदान होना बाकी है । कोर्ट के अनुसार भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं । सह प्रमुख और महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ भी आरोप तय होंगे !

कोर्ट के इस फैसले पर महिला पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि यह महिला पहलवानों के संघर्ष की पहली जीत है । इस पल के लिए बारिश में भी सड़कों पर सोये थे हम लोग ! इसी प्रकार पहलवान बजरंग पूनिया ने भी कहा कि हमारा संघर्ष गलत नहीं था, कोर्ट का धन्यवाद ! कोर्ट का यह फैसला उन सभी महिलाओं को हौंसला देगा, जो तमाम परेशानियों के बावजूद संघर्ष के लिए खराब हालात में भी डटी रहीं !

याद रहे ये वही बेटियां थीं जिनको प्रधानमंत्री आवास पर ओलम्पिक के बाद सम्मान स्वरूप आमंत्रित कर श्री नरेन्द्र मोदी ने चाय पिलाई थी लेकिन जब ये बेटियां दिल्ली में धरने पर बैठ गयीं, तब इनकी ओर कोई ध्यान नहीं गया ! बस, खेलमंत्री अनुराग ठाकुर को कमान सौंप दी इन्हें मनाने – समझाने की ! बेटियां पढ़ीं भी, खेलीं भी और ओलम्पिक मेडल भी लाईं, जिसे बृजभूषण शरण सिंह ने पंद्रह रुपये की कीमत का बताया था ! पहलवान अपने मेडल गंगा में विसर्जित करने चले गये, तब भी इनके दुख और यौन शोषण को नहीं समझा गया बल्कि हरियाणा (Haryana) के राज्यसभा सासद दीपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप लगाया गया कि वे इन महिला पहलवानों के पीछे हैं और सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं और अब कोर्ट के आदेश के बाद क्या कहेंगे ?

जो तिरंगा हाथ में उठाये ये महिला पहलवान देश का गौरव बढ़ाती थीं, वही पहलवान तिरंगे को हाथ में लेकर दिल्ली की सड़कों पर पिट रही थीं ! यह फोटो बहुत वायरल हुआ था ! भाजपा सांसद होने के नाते उसे बचाने के पूरे प्रयास किये गये, जैसे एक नाबालिग युवती के पिता पहले के यौन शोषण के आरोप से पीछे हट गये और कहने लगे कि हमारा तो सिलेक्शन को लेकर विरोध था यानी गवाहों तक को फिल्मी स्टाइल (Filmy Style) में अपने बयान से पीछे हटा दिया गया !

अभी तो हरियाणा की महिला कोच का पूर्व खेलमंत्री व हाॅकी कप्तान संदीप सिंह पर भी मामला चल रहा है । संदीप सिंह का बचाव यह कह कर किया जाता रहा कि अभी आरोप साबित नहीं हुए, जांच चल रही है और जब तक मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर रहे, संदीप सिंह पर कोई आंच नहीं आई । ‌जब नायब सिंह सैनी का नया मंत्रिमंडल बना, तब संदीप सिंह को बाहर किया गया !

महिला पहलवानों का संघर्ष रंग लाया,
आशा है कि महिला कोच का संघर्ष भी रंग लायेगा ।