आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच सालों से सीमा पर चल रहा संघर्ष थमने का नहीं ले रहा नाम

मंगलवार को फ्रांसीसी एलिसी पैलेस ने इस विवाद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाने को कहा है। वहीं यूरोपीय संघ के प्रमुख जोसेप बोरेल ने इस युद्ध को रोकने और बातचीत से समाधान निकालने की बात की है।

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच सालों से सीमा पर चल रहा संघर्ष थम नहीं रहा है। भारत समेत कई देश दोनों देशों से संघर्ष विराम का आग्रह भी कर चुके हैं। वहीं आर्मेनिया ने बताया कि अजरबैजान के साथ चल रही लड़ाई में उसके 105 सैनिक शहीद हो चुके हैं। जिसके बाद यह भी संभावना जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच चला आ रहा यह संघर्ष और बढ़ सकता है। वहीं ये भी दावे किए जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच की जंग में 5 हजार से अधिक लोग मौत के घाट उतर गए हैं।

वहीं अज़रबैजान ने अर्मेनिया पर यह आरोप लगाया है कि अर्मेनिया ने विध्वंशक कार्यों को अंजाम दिया है। अज़रबैजान के विदेश मंत्रालय का यह कहना है कि उसके सैनिक बलों को इस संघर्ष का सामना करना पड़ा है।

अर्मेनियाई प्रधान मंत्री निकोल पशिनयान ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राजनयिक प्रमुख एंटनी ब्लिंकन के साथ अलग-अलग बात की है। मंगलवार को तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू ने कहा कि उन्होंने अजरबैजान के साथ अर्मेनिया का अजरबैजान को उकसाने को लेकर चर्चा की और आर्मेनिया से शांति वार्ता पर ध्यान देने की अपील की है। रूस ने कहा कि इस विवाद को राजनीतिक और राजनयिक तरीकों से सुलझाना होगा और दोनों पक्ष के देशों के बीच शत्रुता को समाप्त करने का अपील करना होगा। 2020 में छह हफ्ते के युद्ध में 6,500 से ज्यादा लोग मारे गए थे और परिणामस्वरूप रूस द्वारा इस युद्ध संघर्ष को रोकने की मध्यस्थता की गई थी।

मंगलवार को फ्रांसीसी एलिसी पैलेस ने इस विवाद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाने को कहा है। वहीं यूरोपीय संघ के प्रमुख जोसेप बोरेल ने इस युद्ध को रोकने और बातचीत से समाधान निकालने की बात की है।