बारिश और बाढ़ से असम में हाहाकार, सेना भी उतरी राहत व बचाव कार्य में

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर है। राज्य के 32 में से 28 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। गांव दरिया बन गए हैं और सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा है। सौ से उपर लोगों के मरने की सूचना है।

गुवाहाटी। असम में बाढ़ और बारिश से पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है। कई नदियां उफान पर है। गांव जलमग्न हो चुके हैं। लाखों लोगों ने अपना घर छोड़ दिया है। सरकार की ओर से राहत व बचाव कार्य जारी है। केंद्र सरकार की ओर से सेना को भी बचाव कार्य में लगा दिया गया है। मेघायल और असम में बारिश से भी इस पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

एक सप्ताह से अधिक समय से पानी में डूबे सिलचर कस्बे में उन इलाकों में राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जहां प्रशासन को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से भोजन, पीने के पानी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के पैकेट गिराने के लिए हवाई मार्ग से पहुंचना बाकी है। अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर नदियों में जल स्तर घट रहा है। हालांकि, नगांव में कोपिली, कछार में बराक और करीमगंज में करीमगंज और कुशियारा खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

असम के असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि सोमवार को बाढ़ के चलते 8 और लोगों की मौत हो गई है। वहीं 21 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने पर असम में अब तक बाढ़ संबंधित घटनाओं में 134 लोगों की मौत हो चुकी है। एएसडीएमए ने एक बुलेटिन में कहा कि इस बीच, राज्यभर में 61 राजस्व मंडलों के तहत 2,254 गांव बाढ़ की मौजूदा लहर से प्रभावित हैं, जबकि 1,91,194 लोगों ने 538 राहत शिविरों में शरण ली है। बाढ़ के पानी से 79 सड़कों और पांच पुलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि छह तटबंध टूट गए हैं। बुलेटिन में कहा गया है कि 74,655.89 हेक्टेयर फसल क्षेत्र अभी भी जलमग्न है, और अब तक 2,774 जानवर पानी में बह गए हैं।