Home ओपिनियन यह लड़ाई है ओबीसी व लोकतंत्र की

यह लड़ाई है ओबीसी व लोकतंत्र की

इस देश के लोकतंत्र को मेरे परिवार के खून ने सींचा है। जो सोचते हैं कि हमें अपमानित कर, एजेंसियों से छापे मरवाकर हमें डरा देंगे, वो गलत सोचते हैं। हम डरने वाले नहीं हैं।

कमलेश भारतीय

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता से एक सीधी सीधी लड़ाई शुरू हुई है । जिसे ओबीसी बनाम लोकतंत्र की लड़ाई कह सकते हैं । एकतरफ जहां भाजपा नेता और इसके समर्थक शिंदे इसे ओबीसी के अपमान की लड़ाई बना रहे हैं यानी राहुल गांधी की छवि को जितना भी जनता की नजर में धूमिल किया जा सके , उतनी की जाये ! भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और रविशंकर प्रसाद ने अपने तीर तरकश में से निकलने में देर नहीं लगाई । इतने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी कूद पड़े यह कहते हुए कि महाराष्ट्र में राहुल को दाखिल नहीं होने देंगे ! यह सब एकदम प्रायोजित और एकदम इवेंट मैनेजमेंट की तरह ! धोया, भिगोया, निचोड़ा और लो हो गया -चकाचक सफेद ! रंग चोखा ! राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा में शायद ठीक ही कहा थे कि जिसकी छवि धूमिल करने के लिये करोड़ों रुपये खर्च दिये गये , मैंने यात्रा के दौरान वे करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिये ! पप्पू कैसे बनाया ? ऐसे ही ईवेंट मैनेजमेंट से । अब पप्पू नहीं रहे तो कोई बात नहीं बना देते हैं ओबीसी का दुश्मन नम्बर वन ! फिर कौन सी यात्रा पर निकलोगे ? बताना जरा ! जैसे एक ग्रामोफोन की एड आती थी -हिज मास्टर वाॅयस ! ऐसे ही ऊपर के आदेश पर सभी कहेंगे कि राहुल तो ओबीसी का दुश्मन है ।
विष्णु प्रभाकर के साथ अहमदाबाद में एक शिविर लगाया था । उन्होंने एक बहुत प्यारी छोटी सी कथा कही थी -चांदनी रात थी । नदी किनारे मेंढक बैठे थे । इनके राजा ने कहा कि चांदनी रात है । कितनी प्यारी बात है । हम सब चुप रहकर इसका लुत्फ लेंगे । फिर तो क्या बात है -सभी मेंढक रात भर यही टर्रा कर एक दूसरे को कहते रहे ! बस । मुखिया ने तो इशारा भर किया था और मेंढक सारी रात टर्राते गये , टर्राते गये !
दूसरी ओर कांग्रेस और खुद राहुल गांधी इसे लोकतंत्र की लड़ाई बताने और बनाने में जुट गये हैं ! कैसे ? एक सुझाव यह आ रहा है कि सभी कांग्रेसी सांसद लोकसभा से इस्तीफे दे सकते हैं । दूसरा कोर्ट की लड़ाई तेजी से और चुस्ती से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी लडेंगे । तीसरे विपक्ष एकजुट होने लगा है और इसे मिलकर ही लड़ने की रणनीति बनाई जायेगी । यह भी आ रहा है कि कोई कांग्रेसी सांसद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बयानों को लेकर कोर्ट में इसी तर्ज पर याचिका लगायेंगे कि लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं ! वे बयान सार्वजनिक भी किये जा रहे हैं । इस तरह अब सभी नेताओं को तोल मोल कर बोलने पर विवश कर दिया जायेगा ! संभल कर मुंह खोला वर्ना कोर्ट में देख लेंगे !

राहुल गांधी ने कहा है कि यह लोकतंत्र की लड़ाई है और बिना संसद के भी लड़ता रहूंगा ! वैसे भी संसद से बाहर आकर भारत जोड़ो यात्रा से ही अपनी छवि बदलने की कोशिश की । ऐसे ही इस आंदोलन को भी लड़ने के लिये आगे आना होगा । किसी ने राहुल की जमानत पर कहा सोशल मीडिया पर कि इतनी तेजी से तो मैगी भी नहीं बनती जितनी तेजी से राहुल की जमानत हुई । इसका जवाब यह आया कि इतनी जल्दी से किसी की संसद सदस्यता भी नहीं जाती ! आखिर इतनी जल्दी क्या पड़ी थी ! असल में लग रहा है कि यह सब सोचा समझा खेल था । सिर्फ छब्बीस घंटे के अंदर सदस्यता भी गयी ! इसी तरह की बात कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे ने भी कही है कि जब सूरत कोर्ट के जज बदले गये थे , तभी हमें यह अंदेशे हो गया था कि कुछ गलत होने वाला है ! अब यह भी आ रहा है कि जब सदस्य ही नहीं रहे तो लुटियन पर सरकारी बंगला भी छिन जायेगा ! इस तरह जो शुरूआत जैड सिक्युरिटी हटाने से हुई थी वह बंगला छीनने तक पूरी हो जायेगी और यह अहसास करवाया जायेगा कि गांधी परिवार कोई खास परिवार नहीं है ! ये भी इसी देश के साधारण नागरिकों मे से एक परिवार है । गांधी परिवार को साधारण बनाने के लिए इन चीजों को छीनने की बजाय इतिहास को बदलने की जरूरत है । क्या इसके सदस्यों के बलिदान इतिहास से बाहर किये जा सकते हैं ? हालांकि पाठ्यक्रमों में से इन्हें निकालने की चालें भी चली जा रही हैं तो क्या इन्हें आप लोगों के दिलों से मिटा पाओगे ? क्या इतिहास बदल सकोगे ? इस तरह नहीं । बड़ी लकीर खींचिये ! छोटी सोच से ऊपर उठिये ! यह बहुत अच्छे दिन नहीं लाने वाले हैं । यह आत्मघाती कदम न साबित हो जाये ! पुनर्विचार कीजिए । फैसले की घड़ी है कि ओबीसी का अपमान या लोकतंत्र की रक्षा ?
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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