आज है वर्ल्ड मलाला डे, तालीबान ने की थी थी गोली मारकर हत्या की कोशिश

टाइम पत्रिका ने मलाला को 100 सबसे प्रभावित व्यक्तियों में से एक नामित किया है।

महिलाओं के लिए अनिवार्य शिक्षा की मांग करते हुऐ तालिबान की गोली की शिकार हुई पाकिस्तान की 17 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को 2014 मका नोबेल शांति पुरुस्कार दिया गया था।

सयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा 12 जुलाई को मलाला दिवस घोषित किया गया है। मलाला को पाकिस्तान मे महिलाओं के लिए शिक्षा को अनिवार्य बनाए जाने की मांग के बाद 9 अक्टूबर के रोज तालिबान की गोली का शिकार होना पड़ा था।

कौन थी मलाला यूसुफजई?

मलाला का जन्म साल 1997 में पाकिस्तान में हुआ था। उनके पिता का नाम जेयाउदिन यूसुफजई था।

बात 2007 से मई 2009 की है जब मलाला आठवी की छात्रा थी तभी तालिबान ने स्वात घाटी पर कब्जा कर रखा था जिसके डर से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था।

2008 में जब तालिबान ने स्वात घाटी पर अपना नियंत्रण कर लिया तब उसने डीवीडी, ब्यूटी पार्लर, डांस आदि पर बैन लगाना शुरु किया। साल के अंत तक वहां करीब 400 स्कूल बंद हो चुके थे।

इसके बाद मलाला के पिता उन्हे पेशावर ले गए जहां उन्होनें नेशनल प्रेस के सामने ‘हाउ डेयर द तालिबान टेक अवे माय बेसिक राइट टू एजुकेशन’ पर मशहूर भाषण दिया था। वहीं उन्होनें 2009 में बीबीसी के लिए एक डायरी लिखी थी, जिसका उद्देश्य लोगों को तालिबान के विरुद्ध जागरूक करना था।

पुरस्कार

मलाला को अंतरराष्ट्री बाल शांति पुरस्कार (2013) , मैक्सिको का समानता पुरस्कार (2013), सयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार सम्मान (2013), पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार (2011) आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

वहीं टाइम पत्रिका ने मलाला को 100 सबसे प्रभावित व्यक्तियों में से एक नामित किया है।