Last Ardas for farmers : आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को आज अंतिम अरदास, राजनीतिक बयानबाजी भी

किसान आंदोलन बीते एक साल से जारी है। कई किसानों ने जान गंवाई है। हाल ही में लखीमपुर खीरी में किसानों की जान गई। इसके लिए अंतिम अरदास रखा गया हैं। किसान नेताओं के साथ राजनीतिक दलों के लोग पहुंचने वाले हैं। प्रशासन को पूरी तरह से सतर्क कर दिया गया है।

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के विरोध में राजधानी दिल्ली की सीमाओं सहित कई क्षेत्रों में आंदोलन जारी है। इसमें कई किसानों ने अपनी जान गंवाई है। आज देश के कई हिस्सों में ऐसे किसानों के लिए अंतिम अरदास कार्यक्रम रखा गया है। लखीमपुर कांड में मारे गए किसानों लवप्रीत सिंह, नछत्तर सिंह, दलजीत सिंह और गुरविंदर सिंह के लिए अंतिम अरदास होनी है।किसान आंदोलन के साथी नेताओं के साथ राजनीतिक दलों के लोग इसमें शामिल होंगे। कांग्रेस महाससिचव प्रियंका गांधी के इसमें शामिल होने की खबर से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
दूसरी ओर किसान नेताओं की ओर से कहा गया है कि इस मंच को राजनीतिक मंच नहीं बनने दिया जाएगा। हालांकि भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारी के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के राजनेता को मंगलवार की अंतिम प्रार्थना में किसान नेताओं के साथ मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहां केवल संयुक्त किसान मोर्चा के नेता मौजूद रहेंगे।
स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव अपने साथियों के साथ पहले ही लखमीपुर खीरी पहुंच गए हैं। कांग्रेस की ओर से जानकारी दी गई है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा आज लखीमपुर खीरी का दौरा करेंगी। इस दौरान वह 3 अक्टूबर को हुई हिंसा में मारे गए किसानों के ‘अंतिम अरदास’ में हिस्सा लेंगी।एक हफ्ते के भीतर प्रियंका का यह दूसरा लखीमपुर खीरी का दौरा है। तो वहीं, इस कार्यक्रम में हजारों किसानों के पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
किसी प्रकार की कोई अनहोनी न होने पाए, इसके लिए पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है। पर्याप्त पुलिस फोर्स लगाए गए हैं। पीएसी, पैरामिलिट्री, आरएपफ और एसएसबी को भी शहर से लेकर तिकुनिया तक मुस्तैद किया गया है। ड्रोन कैमरों से निगरानी रहेगी।