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UP Election : योगी के लिए लिटमस टेस्ट होगा उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव

पंचायत चुनाव में दल से अधिक प्रत्याशी का महत्व होता है। इसलिए जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों के लिए यह बडा काम होता है। इन पंचायत के लोगों की महत्ता विधानसभा चुनाव में भी अधिक मानी जाती है।

लखनउ। अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की रणभेडी बज चुकी है। भाजपा अपना वहां पूरा जोर लगा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी सभाओं में उत्तर प्रदेश के विकास माॅडल की बात करते नहीं अघाते हैं। दूसरी ओर, उत्तर प्रेश में पंचायत चुनाव की तैयारी अंतिम चरण में है। इसे राज्य की भाजपा सरकार के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। जनता का मूड क्या है, उसके आधार पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के किस्मत का फैसला होगा।

हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से उम्मीदवारों के चयन प्रक्रिया में है। पंचायत चुनाव में दल से अधिक प्रत्याशी का महत्व होता है। इसलिए जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों के लिए यह बडा काम होता है। इन पंचायत के लोगांे की महत्ता विधानसभा चुनाव में भी अधिक मानी जाती है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की तैयारी भी पूरी हो गई है।

चुनाव आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव की राजनीति करने को इस बार प्रधानों को जमानत राशि दो हजार देनी होगी। जबकि जिला पंचायत सदस्य को चार हजार और क्षेत्र पंचायत सदस्य की जमानत राशि दो हजार होगी। कहा गया है कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछडा वर्ग और महिला वर्ग को जमानत राशि आधी देनी होगी। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अधिकतम व्यय 1 लाख 50 हजार, सदस्य क्षेत्र पंचायत के लिए 75 हजार, ग्राम प्रधान के लिए 75 हजार और सदस्य ग्राम पंचायत के लिए अधिकतम खर्च 10 हजार रुपये होगा। सदस्य ग्राम पंचायत को केवल घोषणा पत्र देना होगी लेकिल जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान को शपथ पत्र भी देना होगा।

सबके मन में यह सवाल है कि आखिर यह पंचायत चुनाव कब होगा ? इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चैधरी की ओर से एक बयान जारी करके कहा गया कि 20 मार्च के बाद राज्य चुनाव आयोग कभी भी पंचायत चुनाव के लिए मतदान की तिथियों की घोषणा कर सकता है। 25 अप्रैल तक चारों चरणों के चुनाव पूरे होने की उम्मीद है। मई में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों का चुनाव होना है।

आरक्षण सूची जारी होने के बाद गांवों में सियासी घमासान मचा हुआ है। कई दावेदारों का गणित बिगड़ा तो वो दूसरे उम्मीदवारों को लड़ाने की तैयारी कर रहे है। गांवों में इन दिनों राजनीति माहौल बना हुआ है। दावतों का दौर चल रहा है तो कोई सोशल मीडिया के प्रचार में लगा हुआ है।

जिस प्रकार से त्रिस्तरीय पंचायत के वार्डों का आरक्षण हुआ है, उसको लेकर गांव की सियासत अचानक से गरमा गई है। आरक्षण पर कोई आपत्ति लगा रहा है तो कोई प्रचार में जुटा हुआ है। अभी से संभावित उम्मीदवरों बैठकों और आपसी सभाओं का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। बता दें कि बागपत और शामली जिले की जिला पंचायत कभी आरक्षित नहीं हुईं थीं, लेकिन इस बार दोनों जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित हैं। समाजवादी पार्टी का गढ माने जाना वाला सैफई समेत 87 ब्लॉक प्रमुखों के पद कभी आरक्षित नहीं हुआ था। इस बार इसे आरक्षित कर दिया गया है। इसको लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि भाजपा शासन की ओर से जानबूझकर ऐसा किया गया है।

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