आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में मिली “अमृत” रूपी वैक्सीन

सही मायने में आजादी के 75वें साल के रूप में अमृत महोत्सव मना रहे देश को कोविड टीकाकरण अभियान ने 75 करोड़ का आंकड़ा पार करने पर जश्न मनाने का एक और बेहतर अवसर दिया है।

नई दिल्ली। 11 मार्च वर्ष 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को महामारी घोषित किया। इससे पहले कोविड के लिए जिम्मेदार वायरस (एसएआरएस वीटू) चीन के वुहान शहर तबाही मचा चुका था। दिसंबर 2019 में चीन में कोविड का पहला मामला देखा गया, जनवरी तक वायरस ने कई एशियाई देशों को अपनी गिरफ्त में ले दिया। भारत में कोविड का पहला मामला जनवरी 2020 में केरल में देखा गया। चीन के वुहान शहर से मेडिकल की पढ़ाई करके वापस लौटी नर्स में कोविड के लक्षण देखे जाने के बाद उसे क्वारंटीन कर दिया, हालांकि बाद में नर्स पूरी तरह ठीक हो गई। लेकिन इसके बाद वायरस का प्रकोप धीरे-धीरे देश के हर राज्य में बढ़ा गया। दिल्ली में कोविड से पहली मौत मार्च महीने में राममनोहर लोहिया अस्पताल में दर्ज गई, महिला बुजुर्ग के बेटे (दिल्ली के पहले कोविड मरीज रोहित बत्रा) के जरिए वायरस ने परिवार में पांव पसारे और घर के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में कोविड संक्रमण की वजह से कुल चार लाख 42 हजार लोगों की मृत्यु हुई। (आंकड़े वल्र्ड कोविड मीटर दिनांक 13 सितंबर 2021 तक के), लेकिन इसी बीच सरकार ने 16 जनवरी से देश कोविड टीकाकरण के रूप में पहला व्यस्क टीकाकरण लांच किया। जिसने नौ महीने के समय में कई प्रतिमान स्थापित कर लिए हैं।
बात अमृत महोत्सव और आजादी के 75 साल पूरे होने की हो और इतिहास पर नजर न डाली जाए तो बेमाना हो जाएगा। देश ने इससे पहले महामारी का भयंकर रूप वर्ष 1918 में स्पेनिश फ्लू के रूप में देखा था, जबकि देश 200 साल पुराने ब्रिटिश शासन की जद में था। ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के चलते हर नागरिक के दिल में आजाद हिंद का सपना था। ब्रिटिश शासन के तख्ता पलट की वजह यूं तो कई घटनाएं बनी, लेकिन आजादी की अलख 1918 में जगी, जबकि अमेरिका से होता हुई स्पेनिश फ्लू महामारी ने भारत में दस्तक दी। दरअसल यही वह समय था जबकि प्रथम विश्व युद्ध (वर्ष 1914-1918) छिड़ा हुआ था। अमेरिका से फौजी टुकड़िया हमले के लिए अन्य देशों में भेजी जा रही थीं। अमेरिका फारगोटेन पेंडेमिक, द इंफ्लूएंजा ऑफ 1918, किताब के लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस ऑस्टि के प्रोफेसर एल्फ्रेड डब्लू क्रासबाये ने लिखा कि स्पेनिश फ्लू ने अमेरिका सहित विश्व भर में तबाही मचाई।
45000 हजार अमेरिकी सैनिकों की मौत के साथ ही स्पेनिश फ्लू से विश्वभर में पचास से सौ मिलियन लोगों की जान चली गई। दरअसल अमेरिका के सैन्य टुकड़ियों पर वायरस ने हमला किया और विश्व युद्ध के लिए तैनात किए गए सिपाहियों के जरिए वायरस विश्व के हर देश तक पहुंच गया। कहा यह भी जाता है कि केवल स्पेन ही ऐसा देश था जो प्रथम विश्व युद्ध में शामिल नहीं था, उस समय स्पेन के कुछ समाचार पत्रों ने इसे स्पेनिश फ्लू का नाम दिया, जिससे युद्ध में जंग के लिए गए सिपाहियों का संक्रमण की खबरें पढ़कर मनोबल न टूटे कि विश्व युद्ध के साथ ही घातक स्पेनिश फ्लू की भी चपेट में आ चुका है।
भारत में स्पेनिश फ्लू का पहला मामला मुंबई तत्कालीन बांबे में मई वर्ष 1918 में देखा गया। भारत में महामारी के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पर शोध करने वाली मेट्रोपोलिटेन स्टेट यूनिवर्सिटी की कम्यूनिटी फैकल्टी की शोधकर्ता मौराचुन ने अपने शोधपत्र में वर्ष 2020 में लिखा कि शुरूआत में ब्रिटिश सरकार ने भारत में स्पेनिश फ्लू को गंभीरता से नहीं लिया। बल्कि कुछ मजदूर जो बीमार महसूस कर रहे थे, उनके बारे में एक ब्रिटिश ऑफिसर ने बहुत ही अमानवीय टिप्पणी की कि यह फसलों की कटाई का समय है मजदूर इसलिए खुद को बीमार दिखा रहे हैं जिससे उन्हें दिनभर काम न करना पड़े। बाद में इसी साल सितंबर महीने में एक अखबार में खबर प्रकाशित की गई, जिसमें अकेले सितंबर महीने में स्पेनिश फ्लू से 293 लोगों की मौत की सूचना दी गई। उस समय भी मुंबई संक्रमण का हब था, क्योंकि कई तरह की व्यापारिक और योजनाएं मुंबई से ही बनाई जाती थी, इसलिए अन्य राज्यों को ब्रिटिश अधिकारी, डिप्लोमेट और मजदूरों का यहां आना जाना रहता था।
1919 से शुरू हुई स्वतंत्रता की लड़ाई 15 अगस्त 1947 में भारत की आजादी के बाद ही खत्म हुई। देश की आजादी का 75वां साल हम अमृत महोत्सव के रूप में मना रहे हैं, देश की तरक्की, विकास और उद्यमशीलता के बीच आजादी के अमृत महोत्सव में टीकाकरण अभियान ने 75 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर लिया है, जिससे इस साल को दोगुने उत्साह के साथ मनाने की बड़ी वजह कहा जा सकता है, स्पेनिश फ्लू के समय देश आजाद नहीं था, इसलिए वैक्सीन ईजाद नहीं की जा सकी, लेकिन आजाद भारत ने कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन नामक हथियार भी किसी अमृत से कम नहीं