West Bengal News : रामपुरहाट हिंसा मामले में सीबीआई जांच का आदेश

बीरभूम घटना पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि यह एक शर्मनाक घटना है और शासन पर एक धब्बा है। लोकतंत्र में लोगों को इस तरह से जिंदा जलाना बहुत दर्दनाक होता है। मैं सरकार से रक्षा की पेशकश करने के बजाय सबक सीखने की अपील करता हूं।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में हिसा रूकने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगातार भाजपा और वाम दलों सहित कांग्रेस का आरोप है कि वो कानून व्यवस्था को नहीं संभाल पा रही है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ कई बार सरेआम सरकार को खूब सुना चुके हैं। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठते ही रहे हैं। अब वीरभूम जिला के रामपुरहाट हिंसा मामला पूरे देश का ध्यान खींचा है। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने का आदेश दे दिया। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बीरभूम के रामपुरहाट हिंसा मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया। रिपोर्ट सात अप्रैल तक देनी है।

बता दें कि TMC नेता की हत्या के बाद भड़की हिंसा में दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों की जान चली गई. वहीं, फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिंदा जलाए गए आठ लोगों को नरसंहार से पहले बुरी तरह पीटा गया था। वहीं, घटना के संबंध में अब तक कम से कम 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

एनएचआरसी के उपनिदेशक जैमिनी कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि बीरभूम में हिंसा की वारदात में छपी मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेकर चीफ सेक्रेटरी और DGP के माध्यम से पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस भेज रिपोर्ट मांगी हैं। 4 सप्ताह का समय दिया है। सभी पक्षों को सुनकर आयोग सिफारिशें देगा।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि यहां के लोग सरकार पर भरोसा नहीं करते हैं, इसलिए हमने आर्टिकल 355 की मांग की है, हम इसके लिए कोर्ट में भी गए। हमारी मांग है कि CBI की जांच हो। बंगाल की मुख्यमंत्री आज यहां पिकनिक करने आईं थीं। हेलिकॉप्टर से आईं यहां खाना खाया और चली गईं। मुख्यमंत्री को यहां के लोगों के साथ बैठ कर उनकी बात सुननी चाहिए थी। मुझे भी यहां आने से रोका गया था, मैंने 2 घंटे धरना दिया तब जाकर मुझे यहां आने की इजाजत मिली। ये किसी के बाप का रास्ता है क्या? ममता बनर्जी के पिता जी की संपत्ति है क्या?

भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल अराजकता की स्थिति में है। 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं के घरों में आग लगा दी। कई कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं। ये हत्याएं (बीरभूम हिंसा) सरकार के तत्वावधान में हो रही हैं। लोग दहशत के माहौल में जी रहे हैं। बंगाल में लोगों को बोलने की आजादी नहीं है और जो सरकार के खिलाफ बोलता है उसकी हत्या कर दी जाती है। पश्चिम बंगाल में कोई भी कानून व्यवस्था नहीं है। अगर परिस्थितियां ऐसी ही बिगड़ती हैं तो हम राष्ट्रपति शासन की मांग करेंगे।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जो वहां (बीरभूम में) हुआ वह बताता है कि राजनीतिक पार्टियां उस राज्य के मुसलमानों के नाम पर वोट लेती है लेकिन उनको न शिक्षा और न कलम देती बल्कि उनके हाथों में बम थमा देती है। जो भी बीरभूम में हुआ उसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।