स्टालिन – सोनिया की मुलाकात के क्या हैं सियासी संकेत ?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार एमके स्टालिन दिल्ली आए। सोनिया गांधी के आवास पर मुलाकात हुई। नेताओं की ओर से इसे औपचारिक मुलाकात बताया गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है।

नई दिल्ली। जब कई राजनीतिक दलों में नेताओं की आवाजाही हो रही है, ऐसे में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच हुई मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकले जा रहे हैं। 10 जनपथ में हुई इस मुलाकात को लेकर दोनों दलों के बीच बेहद उत्सुकता थी। खास बात यह रही कि इस मुलाकात के दौरान सांसद राहुल गांधी और स्टालिन की पत्नी दुर्गावती स्टालिन भी मौजूद थीं।

राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि इस मुलाकात के साथ तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस की एकता को और अधिक मजबूत किया जाएगा। साथ ही यह संदेश दिया गया कि यह गठबंधन मजबूत है। आगे भी इसी प्रकार चलता रहेगा। जब भी राज्य के सामने किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होगी, कांग्रेस और द्रमुक इसका मिलकर मुकाबला करेंगे।

वैसे, कांग्रेस नेताओं की ओर से इस मुलाकात को महज औपचारिक मुलाकात बताया गया। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद स्टालिन की कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ यह पहली मुलाकात है। मुलाकात के बाद राहुल गांधी की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया कि कांग्रेस तमिलनाडु को मजबूत एवं समृद्ध बनाने के लिए द्रमुक के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

बता दें कि अप्रैल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में द्रमुक, कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के गठबंधन ने शानदार जीत हासिल की। उसके बाद स्टालिन ने पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला है। उनके सामने राज्य की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के साथ ही अपने पिता व द्रमुक के संस्थापक एम करूणानिधि की नीतियों का प्रचार-प्रसार भी करना है।