कब से शुरू हो रही नवरात्रि, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कथाओं के अनुसार जब महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया था तो सभी देवी देव ने त्रिदेव से सहायता मांगने के लिए गए, लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के वजह से त्रिदेव मजबूर रहे। इसके बाद त्रिदेवों ने अपनी शक्ति से मां दुर्गा का सृजन किया था।

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत पितृ पक्ष अमावस्‍या के बाद होती है। अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की तिथि के दिन शारदीय नवरात्रि का प्रथम दिन होता है। इस दिन लोग घर पर कलश कि स्‍थापना करते हैं तथा नौ दिनों के उपवास की शुरुआत होती है। जो व्यक्ति पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख पाता हैं, वह नवरात्रि के पहले दिन और अष्‍टमी के दिन व्रत रखता है। नवरात्रि का दिन बहुत शुभ होता है। शारदीय नवरात्रि बुराई पर अच्‍छाई की जीत का त्योहार है। यह दिन मां दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है।

कथाओं के अनुसार जब महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया था तो सभी देवी देव ने त्रिदेव से सहायता मांगने के लिए गए, लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के वजह से त्रिदेव मजबूर रहे। इसके बाद त्रिदेवों ने अपनी शक्ति से मां दुर्गा का सृजन किया था। सभी देवताओं नें मां दुर्गा को अपनी-अपनी शक्ति और अस्त्र-शस्त्र दिये। जिसके बाद मां दुर्गा और महिषासुर का युद्ध नौ दिनों तक चला। दसवें दिन माता ने उसका वध किया। तब से इस दिन को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष नवरात्रि के नौ दिन माता की पूजा कि जाती है। और दशवें दिन दशेहरा का त्योहार मनाया जाता है।

कलश स्थापना कि विधि

सबसे पहले पूजा के जगह की साफ-सफाई करें या फिर एक चौकी रखकर उस पर लाल रंग का एक कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की मूर्ति रखें। श्री गणेश को याद कर पूजा का काम शुरू करें। माता के सामने उनके नाम की अखंड ज्योत जलाएं। फिर मिट्टी का चौड़ा बर्तन लेकर उसमें थोड़ी सी मिट्टी डालें, उसमें जौ के बीज डालें। इसके बाद कलश को अच्छे से साफ करके उस पर कलावा बांधें और स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। कलश में गंगा जल डालकर पानी भरें, उसमें दूब, साबुत सुपारी, अक्षत और कुछ दक्षिणा डालें। इसके बाद कलश के ऊपर आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं और कलश को बंद कर दे। इसके ढक्कन के ऊपर अनाज को भरें, फिर नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर इसके ऊपर रखें। अब इस कलश को जौ वाले मिट्टी के बर्तन के बीचो-बीच रख दें। इसके बाद सभी देवी देवताओं का आवाह्न करके माता के सामने उपवास करने का संकल्प लें और विधिवत रूप से पूजा कि शुरुआत करें। कलश कि स्‍थापना करने के बाद नौ दिनों तक इसे बिल्‍कुल न हिलाएं।

कब है कलश स्थापना मुहूर्त

शुभ मुहूर्त 26 सितंबर को प्रातः 03:23 बजे शुरू होगी और 27 सितंबर को प्रातः 03:08 बजे तक रहेगी। ऐसे में 26 सितम्बर से नवरात्रि कि शुरुआत होगी। सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर 07 बजकर 51 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त होगा। वहीं सुबह 06:11 एम से 07:42 तक चौघड़िया का अमृत्त मुहूर्त है। कलश स्‍थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को भी शुभ माना जाता है। दोपहर 11:48 एम से 12:36 पीएम के बीच अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्‍थापना कर सकते हैं।