राहुल गांधी के महाकालेश्वर दर्शन से भाजपा घबराई क्यों है?

हद तो ये है कि राहुल गांधी की उज्जैन दर्शन की तीन दिन पुरानी फोटो शेयर करके भाजपा आईटी सेल वाले पूछ रहे हैं कि वे दक्षिण भारत के मंदिरों में तो नहीं गए, हिंदी प्रदेश के मंदिर क्यों जा रहे हैं? मजे की बात है कि राहुल कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में भी मंदिरों के दर्शन करने गए थे, जिसकी तस्वीरें कांग्रेस के अकाउंट्स और वेबसाइट्स पर मौजूद हैं।

भारत जोड़ो यात्रा ने भाजपा के अंदर जबरदस्त खलबली पैदा की है। जबसे यात्रा चली है, राहुल गांधी यात्रा के रूट पर पड़ने वाले मंदिरों में जाकर दर्शन भी कर रहे हैं। वे दक्षिणी राज्यों के मंदिरों और मठों में भी गए। इसी क्रम में यात्रा उज्जैन पहुंची तो महाकालेश्वर भी गए। इसकी तस्वीरें सामने आते ही भाजपा ने अप्रत्याशित बेचैनी दिखाई। यहां तक कि स्मृति ईरानी ने उनकी तस्वीर उलट कर पोस्ट कर दी।

स्मृति ईरानी दिखाना चाहती थीं कि राहुल गांधी ने ॐ लिखा हुआ गमछा डाला है और ॐ उल्टा दिख रहा है। हड़बड़ी में इतना भी नहीं सोच सकीं कि जो दिख रहा है वह सीधा गमछा ओढ़ने पर लटकने और सामने से कैमरे की वजह से है। उन्होंने आरती करते हुए राहुल गांधी की तस्वीर उलट कर पोस्ट कर दी। इस तरह उन्होंने आरती का दीपदान उलट दिया।

उस दिन भाजपाइयों ने राहुल गांधी को भरपूर ट्रोल करने की कोशिश की। हड़बड़ी और बेचैनी इतनी ज्यादा थी कि एक वीडियो पोस्ट करके कहा गया ​कि राहुल गांधी आरती उल्टी कर रहे हैं। उसी वक्त कांग्रेस ने मोदी का वीडियो जारी किया जिसमें वे भी वैसे ही आरती कर रहे थे।

अगर उनकी पोस्ट को आधार बनाएं तो आप कह सकते हैं कि भाजपा के ट्रोल्स मंत्रियों और आईटी सेल को न आरती के बारे में कोई जानकारी है, न ही रामनामी गमछे के बारे में। वे सिर्फ यही तौलना जानते हैं कि किसकी मां कौन है, किसका बाप कौन है, किसकी जाति कौन है, किसका धर्म कौन है।

सवाल वही है कि भाजपा इतनी घबराई क्यों है?