हर साल 12 जुलाई को क्यों मनाया जाता है पेपर बैग डे और क्या है इसका इतिहास?

दुनिया में पहली बार पेपर बैग मशीन साल 1852 में बनी थी। वहीं प्रदूषण को रोकने के प्रयास में हर साल 12 जुलाई को पेपर बैग डे मनाया जाता है।

आज के समय मे प्लास्टिक का इस्तेमाल इतना बढ़ गया है कि प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। वायु से लेकर जल तक सब कुछ दूषित हो चुका है और निरंतर होता जा रहा है। इस प्रदूषण को रोकने के प्रयास में हर साल 12 जुलाई को पेपर बैग डे मनाया जाता है जिसको मनाने का एक मात्र लक्ष्य प्लास्टिक की बजाए पेपर बैग का इस्तेमाल और उसके उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाना है।

पेपर बैग के फायदे

  • प्लास्टिक बैग बनाने की तुलना में पेपर बैग बनाने में कम ऊर्जा लगती है।
  • पेपर बैग का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए भी किया जाता हैं जबकि प्लास्टिक बैग को नष्ट करने मे बहुत ज्यादा वक्त लग जाता है।

प्लास्टिक के नुकसान

दरअसल, प्लास्टिक को सड़ने में सालों लग जाते हैं, जिसकी वज़ह से प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। पशु भी इस प्लास्टिक को खा लेते हैं जो कि उनकी पाचन क्रिया के लिए हानिकारक होता है और कई बार तो उनकी मौत भी हो जाती है।

पेपर बैग की शुरुआत

दुनिया में पहली बार पेपर बैग मशीन साल 1852 में बनी थी। उसके बाद 1871 में बनी मशीन जो की किराने की थैलियों की मां के रुप मे लोकप्रिय हो गई। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से, चार्ल्स स्टीलवेल ने पेपर बैग को एक अच्छा डिज़ाइन दिया।

क्यों हैं पेपर बैग प्लास्टिक बैग से अच्छा

प्लास्टिक जल्दी रिसाइकल नहीं हो पाते और इन्हें खाद के रुप में बदलने में भी कई साल लग जाते हैं जबकि पेपर आसानी से रिसाइकल हो जाते हैं। यानी कुल मिलाकर पेपर बैग के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगाई जा सकती है।