G7 Summit : क्यों तालिबान के बातों पर दूसरे देशों को नहीं हो रहा है भरोसा ?

तालिबान को लेकर दुनिया के अन्य देश के नेताओं को अभी पूरा तरह से भरोसा नहीं हो रहा है। जी7 की बैठक में भी यही बात उठी है। ब्रिटेन और अमेरिका तालिबान के हर हरकत पर निगाहें बनाए हुए है।

नई दिल्ली। अफगानिस्तान में बंदूक की नोक पर और हिंसा के बूते तालिबान (Taliban) ने भले ही सत्ता हासिल कर ली हो। जनता को भरोसा दिलाने के लिए बयान जारी कर रहा हो। तालिबान के प्रवक्ता मानव अधिकारों और महिलाओं की चिंता की बात करते हों। अन्य देशों को तालिबान को मान्यता देने की बात करते हों, लेकिन लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है।

जी7 (G7 Summit) की बैठक में कई देशों के नेताओं को तालिबान (Taliban) पर अब भी भरोसा नहीं हो रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) ने तो सीधेतौर पर कहा कि तालिबान को बातों से नहीं, बल्कि उसके कामों से आंका जाएगा। जॉनसन (Boris Johnson) ने कहा, “हमारी पहली प्राथमिकता, हमारे नागरिकों और पिछले 20 साल में हमारी कोशिश में मदद करने वाले अफगानिस्तान के लोगों को निकालना है, लेकिन जब हम अगले चरण की योजना बनाते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के तौर पर हम साथ आएं और दीर्घावधि के लिए एक संयुक्त दृष्टिकोण पर सहमत हों।”

असल में, अफगानिस्तान के संकट पर जी7 देशों की आपात बैठक की अध्यक्षता करने से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) ने कहा कि बैठक के दौरान, जॉनसन समूह (जी) सात के नेताओं से अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़े रहने और शरणार्थियों और मानवीय सहायता को मजबूत करने का आह्वान करेंगे। इस बीच जॉनसन ने बैठक से पहले सोमवार शाम को अफगानिस्तान के संकट पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से बात की। डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने कहा, “उन्होंने काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अपने नागरिकों और अपनी सरकारों के साथ काम करने वाले लोगों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से निकालने के ब्रिटेन और अमेरिका के प्रयासों को समन्वित करने पर चर्चा की।”