Yog & Pranayam, रेस्पिरेटरी सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाएं इससे, शुरुआत में 10 बार ही करें

कोरोना से लड़ना है तो रोज़ाना रेस्पिरेटरी सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाएं। इसमें कारगर है भस्त्रिका प्राणायाम। इसे दिनचर्या में शामिल करें, फिर देखें कैसे फेफड़े लोहे से हो जाएंगे।

नई दिल्ली। आप जब भी योग की शुरुआत करें, तो कम से कम 5 मिनट के लिए सूक्ष्म क्रियाएं जरूर करें। फिर भले आप आसन करें या प्राणायाम। सूक्ष्म क्रियाओं से मांसपेशियों में खिचांव नहीं पड़ता और शरीर के सभी अंग एक्टिव मोड में आ जाते हैं। आज पर श्वास प्रणाली को फिट करते हैं। इसके लिए भस्त्रिका प्राणायाम बेहतरीन है। भस्त्रिका का मतलब है धौंकनी। इस प्राणायाम में सांस की गति धौकनी की तरह हो जाती है। यानी श्वास की प्रक्रिया को जल्दी-जल्दी करना ही कहलाता है भस्त्रिका प्राणायाम।

भस्त्रिका प्राणायाम करने सही विधि

भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन, पीठ एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें। इसके बाद बिना शरीर को हिलाएं। दोनों नसिका छिद्र से आवाज़ के करते हुए श्वास भरें। फिर आवाज़ करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें। अब तेज गति से आवाज़ लेते हुए सांस भरें और बाहर निकालें। यही क्रिया भस्त्रिका प्राणायाम कहलाती है। हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आंखें बंद रहेंगी। ध्यान रहे श्वास लेते और छोड़ते वक़्त हमारी लय ना टूटे। नए अभ्यासी इस क्रिया को शुरू-शुरू में 10 बार ही करें।

फायदे भी जानें

भस्त्रिका प्राणायाम सिर्फ श्वास तंत्र को फिट नहीं रखता। इसके कई लाभ हैं, जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे, जैसे-

  • इस प्राणायाम के अभ्यास से मोटापा दूर होता है।
  • शरीर को प्राणवायु अधिक मात्रा में मिलती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है।
  • इस प्राणायाम से रक़्त की सफाई होती है और शरीर के सभी अंगों तक रक़्त का संचार भलि-भांति होता है।
  • इसके नियमित अभ्यास सक जठराग्नि तेज़ हो जाती है और दमा, टीवी और सोसों के रोग दूर हो जाते हैं।
  • फेफडे़ को बल मिलता है, स्नायुमंडल सबल होते है।
  • इसके नियमित अभ्यास से पाचन संस्थान, लीवर और किडनी की मसाज होती है।

कुछ सावधानियां भी

  • योगिक क्रियाएं योग गुरु के सान्निध्य में ही करें।
  • स्लिप डिस्क, साइटिका, उच्च रक्तचाप, हृदय, हर्निया, अल्सर, मिर्गी स्ट्रोक के रोगी व गर्भवती महिलाएं योगिक क्रियाएं नहीं करें।