सर्कुलर में गलत भाषा का इस्तेमाल, मोहर्रम का अपमान : मौलाना कल्बे जव्वाद

मोहर्रम के आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से सर्कुलर जारी किया गया है। शिया धर्म गुरू ने सर्कुर की भाषा पर आपत्ति दर्ज कराई है। इसको लेकर अब बयानबाजी शुरू हो गई है।

लखनऊ। कोरोना काल में सामाजिक और धार्मिक आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन गाइडलाइन जारी करती है। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन की ओर से मोहर्रम को लेकर गाइडलाइन जारी की गई। इसकी भाषा को लेकर बवाल हो रहा है। धार्मिक गुरू मौलाना कल्बे जव्वाद ने इस संदर्भ में मीडिया से बात की और कहा कि गाइडलाइन के सर्कुलर में जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है, वह मोहर्रम का अपमान है।

लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में धार्मिक गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि सर्कुलर में गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसमें गोवंश और यौन संबंधी घटनाओं का जिक्र किया गया है जो कि मोहर्रम का अपमान है। उन्होंने कहा कि सर्कुलर का बयान प्रदेश के पुलिस मुखिया का नहीं बल्कि अबु बक्र बगदादी का प्रतीत होता है। डीजीपी को अपना बयान वापस लेना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने सभी मोहर्रम कमेटियों से पुलिस की किसी भी मीटिंग में न शामिल होने की अपील की है।

प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल ने रविवार शाम को ही इस पर सफाई दे दी थी। उन्होंने कहा कि मोहर्रम को लेकर सर्कुलर पिछली बार की तरह इस बार भी जारी किया गया है। जो पत्र वायरल हो रहा है, उसके बारे में एडीजी कानून व्यवस्था को सच्चाई पता करने के लिए कहा गया है।

वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से कहा गया है कि इस साल मुहर्रम 10-19 अगस्त तक संपन्न होगा, इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश फील्ड के अधिकारियों के लिए 31 जुलाई को पुलिस महानिदेशक कार्यालय से जारी किया गया है। इसमें क्या करना है और क्या नहीं व पूर्व में किस तरह के विवाद इस दौरान होते हैं, इसका उल्लेख है। इसमें बताया गया है कि असामाजिक तत्व सौहार्द बिगाड़ने का काम कर सकते हैं, उन पर कड़ी नज़र रखी जाए और कार्रवाई की जाए।