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राष्ट्र संस्कृति रक्षा के लिये पूरा जीवन समर्पित : अकबर चित्तौड़ पर अधिकार कर...

  रमेश शर्मा भारतीय इतिहास के एक प्रकाशमान नक्षत्र हैं चित्तौड़ के राणा प्रताप। जो न किसी प्रलोभन से झुके और न किसी बड़े आक्रमण से भयभीत हुये । उन्होंने स्वाधीनता और स्वाभिमान के लिये जीवन...

सहभागिता में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से कहीं आगे है विश्व पुस्तक मेला

सुभाष चन्द्र नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहा विश्व पुस्तक मेला 2026 इस वर्ष एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि भारत में ज्ञान, पाठक और प्रकाशन की सबसे बड़ी सार्वजनिक...

New Delhi Book Fair 2026 : कलम से राष्ट्रनिर्माण, युवा लेखकों में निवेश का...

अनंत अमित ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति किसी भी राष्ट्र की बौद्धिक रीढ़ होते हैं। इसी दृष्टि को साकार करता हुआ पीएम-युवा 3.0 (प्रधानमंत्री युवा लेखक मार्गदर्शन योजना) आज उभरते लेखकों को न केवल मंच दे...

सोमनाथ: भारत की सभ्यतागत चेतना का शाश्वत प्रकाश स्तंभ

डॉ धनंजय गिरि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पावन सोमनाथ धाम में श्रद्धांजलि अर्पित करना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी सभ्यता और उसकी निरंतरता को नमन करने का एक गहन...

न्याय बनाम सत्ता: पुलिस सुधार ही लोकतंत्र की असली परीक्षा

  रीना एन सिंह न्याय का भविष्य पुलिस की वास्तविक, संरचनात्मक और संस्थागत स्वतंत्रता से गहराई से जुड़ा हुआ है, क्योंकि जब तक पुलिस राजनीतिक हस्तक्षेप, सत्ता–अपराधी गठजोड़, भ्रष्टाचार और स्वार्थपूर्ण दबावों से मुक्त नहीं होगी,...

सुरक्षित और संरक्षित भारत की नींव को सुदृढ़ करता ऐतिहासिक वर्ष

    अनंत अमित वर्ष 2025 भारत के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “सुरक्षित, संरक्षित और विकसित भारत” के संकल्प को जमीन पर...

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार : मानवाधिकारों की चुप्पी और सभ्यता की शर्म

  कृष्णमोहन झा बांग्लादेश में हिन्दू समुदाय के साथ हो रही घटनाएं अब किसी “आंतरिक कानून-व्यवस्था” का विषय नहीं रहीं। यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की खुली अवहेलना अल्पसंख्यकों के विरुद्ध सुनियोजित हिंसा और वैश्विक नैतिकता की कठोर...

भारत के विकास की नई परिभाषा का वर्ष रहा 2025

  अनंत अमित साल 2025 भारत की आर्थिक यात्रा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हो रहा है। यह वर्ष केवल आँकड़ों की मजबूती का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी प्रतीक है जो...

सांस्कृतिक एकता का जीवंत उत्सव: काशी से आरंभ, रामेश्वरम में समापन

डॉ धनंजय गिरि काशी तमिल संगमम 4 भारत की सांस्कृतिक एकता और सभ्यतागत निरंतरता का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। 2 दिसंबर को इसकी शुरुआत काशी में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने...

अमित शाह का संकेत और मध्यप्रदेश की नई सत्ता-व्यवस्था

  कृष्णमोहन झा भारतीय राजनीति में कई बार सबसे निर्णायक घटनाएँ भाषणों से नहीं, बल्कि मौन बैठकों और प्रतीकात्मक संकेतों से तय होती हैं। ग्वालियर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हालिया दौरा भी इसी...

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