नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहा विश्व पुस्तक मेला 2026 इस वर्ष एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि भारत में ज्ञान, पाठक और प्रकाशन की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिघटना यही है। आकार, सहभागिता और प्रभाव—तीनों ही स्तरों पर यह मेला न केवल देश का, बल्कि एशिया के सबसे बड़े पुस्तक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। इसकी व्यापकता की तुलना अक्सर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से की जाती है, तो विश्व पुस्तक मेला कहीं उससे ज्यादा आगे है।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस मेले में भारत साहित्य महोत्सव (बीएलएफ), पुरी साहित्य महोत्सव, एशियन लिटरेरी सोसायटी, एपीजे कोलकाता साहित्य महोत्सव, नालंदा साहित्य महोत्सव, द ग्रेट इंडियन बुक टूर, किस्सा प्रकाशन गृह और शाब्दिक प्रकाशन की सहभागिता देखने को मिलती है। वहीं जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल मुख्यतः लेखकों, विचारकों और बौद्धिक संवाद का मंच है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वंदे मातरम पवेलियन, ऑपरेशन सिंदूर पवेलियन और सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन व योगदान पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का भी दौरा किया। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कहा कि पुस्तकें ज्ञान प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम हैं और उम्र चाहे जो भी हो, पढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि पढ़ने की आदत तेजी से कम होती जा रही है, लेकिन उनका विश्वास है कि डिजिटल हो या प्रिंट—पुस्तकें आज भी ज्ञान अर्जित करने का सबसे प्रभावी साधन हैं।श्री अमित शाह ने बच्चों को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर कृति ‘आनंद मठ’ की प्रतियां भी भेंट कीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘आनंद मठ’ ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनचेतना को जागृत किया। बच्चों को यह पुस्तक भेंट करने का उद्देश्य उनके मन में स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों और राष्ट्रभक्ति की ज्योति प्रज्वलित करना है।
इसके साथ ही गृह मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पवेलियन का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, सशस्त्र सेनाओं की निर्णायक प्रहार क्षमता और सटीक खुफिया जानकारी से संचालित भारत की अजेय सैन्य शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह पवेलियन युवा पीढ़ी को देशभक्ति, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
गृह मंत्री के इस दौरे से नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला न केवल साहित्य और ज्ञान का केंद्र बना, बल्कि राष्ट्रभक्ति, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का भी सशक्त मंच बनकर उभरा। विश्व पुस्तक मेले में केवल साहित्यिक चर्चाएं ही नहीं होतीं, बल्कि लाखों पाठक सीधे पुस्तकों से जुड़ते हैं। स्कूल के बच्चों से लेकर शोधार्थियों, शिक्षकों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और सामान्य परिवारों तक—हर वर्ग के लिए यह मेला एक जीवंत अनुभव बनकर उभरता है।
इस वर्ष मेले का विस्तार और अधिक दिखाई देता है। सैकड़ों प्रकाशक, हजारों स्टॉल, दर्जनों भाषाएँ और हर विषय—शिक्षा, विज्ञान, इतिहास, बच्चों का साहित्य, तकनीक, आत्मकथा, रक्षा अध्ययन—सब कुछ एक ही छत के नीचे उपलब्ध है। अनुमानित तौर पर प्रतिदिन लाखों पाठक मेले में पहुँच रहे हैं, जो इसे किसी भी साहित्यिक उत्सव से कहीं अधिक जन-आधारित बनाता है।
महत्वपूर्ण यह भी है कि विश्व पुस्तक मेला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। यहां छोटे शहरों और कस्बों के प्रकाशक, क्षेत्रीय भाषाओं के लेखक और स्थानीय पाठक भी समान रूप से भाग लेते हैं। यह विविधता जयपुर जैसे विशिष्ट साहित्यिक आयोजनों से इसे अलग करती है, जहां पहुंच और सहभागिता अपेक्षाकृत सीमित रहती है। पहली बार विश्व पुस्तक मेले में फ्री इंट्री दी गई है जो अन्य साहित्यिक आयोजनों से इसे अलग बनाता है।
विश्व पुस्तक मेले की ताकत उसकी लोकतांत्रिक प्रकृति में है। यहां पाठक किताबों को छूता है, खरीदता है, लेखक से मिलता है और पढ़ने की संस्कृति को अपने जीवन का हिस्सा बनाता है। यही कारण है कि इसका प्रभाव कुछ दिनों की चर्चा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि साल भर की पढ़ने की आदतों को दिशा देता है।
कहना गलत नहीं होगा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विचारों का उत्सव है, लेकिन नई दिल्ली का विश्व पुस्तक मेला ज्ञान का जनआंदोलन और इसी व्यापकता, पैमाने और सामाजिक पहुंच के कारण यह आयोजन हर वर्ष और अधिक बड़ा तथा प्रासंगिक होता जा रहा है।















