Covid Update : देश में चिंताजनक है कोरोना का लौटना, क्या कहा है दिल्ली हाइकोर्ट ने ?

एक ओर सरकार कोरोना संक्रमण की बढती संख्या से परेशान है, तो दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी ने टीकाकरण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी कहा कि वह कोविड-19 का टीका पाने के लिए वर्गीकरण किए जाने के पीछे की वजह बताए। वैसे, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाॅक्टर हर्षवर्धन ने अपनी बात कही है।

नई दिल्ली। कोरोना वैक्सीन को लेकर संतोषजनक माहौल है, लेकिन जिस प्रकार से हाल के दिनों में कोरोना संक्रमण में वृद्धि हुई है, वह संबंधित राज्य सरकारों के साथ केंद्र सरकार के लिए भी परेशानी का कारण है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों की टीम उन राज्यों का दौरा कर रही है, जहां पर संक्रमण दोबारा तेज गति से बढा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार,भारत में एक दिन में कोविड-19 के 17,407 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,11,56,923 हो गई। देश में करीब एक महीने बाद 17 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले 29 जनवरी को 24 घंटे में वायरस के 18,855 नए मामले सामने आए थे।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 89 और मरीजों की संक्रमण से मौत हुई और मृतक संख्या बढ़कर 1,57,435 हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी 1,73,413 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 1.55 प्रतिशत है।

बता दें कि देश में पिछले साल सात अगस्त में संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितम्बर को 40 लाख से अधिक हो गई थी। वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितम्बर को 50 लाख, 28 सितम्बर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवम्बर को 90 लाख और 19 दिसम्बर को एक करोड़ के पार चले गए थे।

दूसरी ओर हाईकोर्ट ने कोरोना टीका को लेकर सख्त टिप्पणी भी की है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को कोरोना टीके को बनाने की क्षमता की जानकारी देने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दोनों संस्थानों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक के पास ज्यादा मात्रा में टीका उपलब्ध कराने की क्षमता है, लेकिन ऐसा लगता है कि वे इसका पूरा फायदा नहीं उठा रहे हैं। पीठ ने कहा, ”हम इसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। हम या तो इसे अन्य देशों को दान कर रहे हैं या उन्हें बेच रहे हैं और अपने लोगों को टीका नहीं दे रहे हैं। इसलिए इस मामले में जिम्मेदारी और तात्कालिकता की भावना होनी चाहिए।”

दरअसल, अदालत दिल्ली बार काउंसिल की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें न्यायाधीशों, अदालत के कर्मियों और वकीलों समेत न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों को अग्रिम मोर्चे का कर्मी वर्गीकृत करने की मांग की गयी है। दूसरी ओर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने ट्वीट कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वास्थ्य एवं देशवासियों के समय की अहमियत समझते हैं। उन्होंने ने ट्वीट किया था कि सरकार ने टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए समय की बाध्यता समाप्त कर दी है। देश के नागरिक अब अपनी सुविधानुसार सप्ताह के किसी भी दिन और किसी भी समय टीका लगवा सकते हैं।