नई दिल्ली। तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान में जो भारतीय हैं, उनके परिजन उनकी चिंता में दुबले हो रहे हैं। सरकार के स्तर पर इसके लिए प्रयास हो रहा है। भारत सरकार लगातार संपर्क में है। वायुसेना सहित एयर इंडिया के हवाई जहाज को पूरी तरह से तैयार रहने के लिए कहा गया है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि इस समय हम बहुत सावधानी से अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम का अनुसरण कर रहे हैं। हमारा ध्यान अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी पर है।
वहीं, अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि जो लोग अफ़ग़ानिस्तान में फंसे हैं और वापस लौटना चाहते हैं, उनके परिजन संबंधित ज़िला मजिस्ट्रेट और एसएसपी को संबंधित विवरण दे सकते हैं या 112 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। उत्तराखंड सरकार केंद्र की मदद से उन्हें वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
असल में, जिस प्रकार से अफगानिस्तान में तालिबान बदले की भावना से काम कर रहा है, उससे लोग डरे हुए हैं। बता दें कि तालिबान ने 1990 के दशक में अफगानिस्तान गृह युद्ध के दौरान उनके खिलाफ लड़ने वाले एक शिया मिलिशिया के नेता की प्रतिमा को गिरा दिया। यह प्रतिमा मध्य बामियान प्रांत में थी। यह वही प्रांत है, जहां तालिबान ने 2001 में बुद्ध की दो विशाल 1,500 साल पुरानी प्रतिमाओं को उड़ा दिया था। ये प्रतिमाएं पहा़ड़ को काटकर बनाई हुई थीं। यह घटना अमेरिका नीत बलों का अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता से बाहर किए जाने के कुछ समय पहले हुई थी। तालिबान ने दावा किया था कि इस्लाम में मूर्ति पूजा निषेध है और इन प्रतिमाओं से उसका उल्लंघन हो रहा था। तालिबान ने अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में कुछ दिनों के भीतर कब्जा करते हुए पिछले सप्ताह सत्ता में वापसी कर ली।















