विश्व पर्यावरण दिवस पर पीएम मोदी ने किया ये आह्वान

मिट्टी बचाओ आंदोलन' बिगड़ती मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे सुधारने के लिए जागरूक पहल शुरू करने के लिए एक वैश्विक आंदोलन है। सद्गुरु ने मार्च 2022 में इस आंदोलन की शुरुआत की थी, जिन्होंने 27 देशों

नई दिल्ली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में ’मिट्टी बचाओ आंदोलन’ पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अपने संबोधन में उन्होंने मुझे संतोष है कि देश में पिछले 8 साल से जो योजनाएं चल रही हैं, जो भी प्रोग्राम चल रहे हैं, सभी में किसी ना किसी रूप से पर्यावरण संरक्षण का आग्रह है। स्वच्छ भारत मिशन हो या Waste to Wealth से जुड़े कार्यक्रम, अमृत मिशन के तहत शहरों में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का निर्माण हो या फिर सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्ति का अभियान, या नमामि गंगे के तहत गंगा स्‍वच्‍छता का अभियान, One Sun-One ग्रिड – सोलर एनर्जी पर फोकस हो या इथेनॉल के उत्पादन और ब्लेंडिंग दोनों में वृद्धि, पर्यावरण रक्षा के भारत के प्रयास बहुआयामी रहे हैं और भारत ये प्रयास तब कर रहा है जब दुनिया में आज जो क्‍लाइमेट के लिए दुनिया परेशान है, उस बरबादी में हम लोगों की भूमिका नहीं है, हिंदुस्‍तान की भूमिका नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मिट्टी या ये भूमि, हमारे लिए पंचतत्वों में से एक है। हम माटी को गर्व के साथ अपने माथे से लगाते हैं। इसी में गिरते हुए, खेलते हुए हम बड़े होते हैं। माटी के सम्मान में कोई कमी नहीं है, माटी की अहमियत को समझने में कोई कमी नहीं है। कमी इस बात को स्वीकारने में है कि मानव जाति जो कर रही है उससे मिट्टी को कितना नुकसान हो रहा है, उसकी समझ का एक गैप रह गया है। और अभी सद्गुरू जी कह रहे थे कि सबको पता है समस्‍या क्‍या है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए भारत के प्रयास बहुआयामी हैं। भारत यह प्रयास तब कर रहा है जब जलवायु परिवर्तन में भारत की भूमिका न के बराबर है। दुनिया के बड़े आधुनिक देश न केवल पृथ्वी के अधिक से अधिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, बल्कि अधिकतम कार्बन उत्सर्जन उनके खाते में जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 0.5 टन की तुलना में दुनिया का औसत कार्बन फुटप्रिंट लगभग 4 टन प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है। उन्होंने कहा कि भारत पर्यावरण की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे स्थापित संगठन के सहयोग से दीर्घकालिक दृष्टि पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने 2070 तक भारत के नेट-जीरो के लक्ष्य को दोहराया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से हमारी अनेक बड़ी-बड़ी समस्याओं का बड़ा समाधान होता है। उन्होंने कहा कि इस साल के बजट में सरकार ने तय किया है कि गंगा के किनारे बसे गांवों में नैचुरल फार्मिंग को प्रोत्साहित करेंगे, नैचुरल फॉर्मिंग का एक विशाल कॉरिडोर बनाएंगे। इससे हमारे खेत तो कैमिकल फ्री होंगे ही, नमामि गंगे अभियान को भी नया बल मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को दुरुस्त करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीएस VI मानदंडों को अपनाने, एलईडी बल्ब अभियान पर जोर दिया जा रहा है।