Thermal Power Crisis : कोयले की कमी और बिजली संकट का ये है कनेक्शन

कोयले की कमी और बिजली का संकट का हल्ला कई राज्यों में हो रहा है। दिल्ली सरकार के मंत्री दो दिन से लगातार केंद्र सरकार से कोयले की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार के मंत्री अपना पक्ष तो रखते हैं, लेकिन चिंता जैसे की कोई बात नहीं मानते।

 

नई दिल्ली। कई राज्यों में कोयले के स्टॉक की कमी की बात हो रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि देश के कई हिस्सों में इससे बिजली संकट उत्पन्न हो जाएगा। इस मामले में केंद्रीय मंत्री आरके सिंह अपना पक्ष रख चुके हैं। देश की राजधानी दिल्ली में बिजली संकट की बात पूरे जोर-शोर से की जा रही है। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन लगातार इसके लिए केंद्र सरकार की नीतियों पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने फिर दावा किया है कि दिल्ली के पास सिर्फ दो-तीन दिनों का ही कोयला बच गया है। रविवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह कथित तौर पर ऑक्सीजन की तरह ही कोयले को लेकर भी गलत दावा कर रही है। इसी तरह महाराष्ट्र में 7 थर्मल पॉवर प्लांट की 13 यूनिट बंद होने की बात कही जा रही है।
सवाल यह भी है किक्या वाकई हालात बेकाबू होते जा रहे हैं ? या फिर जितनी चिंता जताई जा रही है, दरअसल स्थिति उतनी भी गंभीर नहीं है ? केंद्र सरकार भी मान रही है कि आमतौर पर बिजली कंपनियों के पास पहले 17 दिन का कोयला स्टॉक में रहता था, जो फिलहाल 4 दिन के करीब आ गया है।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार 4 अक्टूबर को कोयले पर आधारित 135 बड़े बिजली संयंत्रों में से आधे से भी थोड़े अधिक संयंत्रों में कोयले का स्टॉक तीन दिन से भी कम का बच गया था। रविवार को केंद्रीय बिजली मंत्री राकेश कुमार सिंह ने जानकारी दी थी कि विद्युत संयंत्रों के पास चार-साढ़े दिन का कोयला अभी स्टॉक में है और उसे इतना कोयला रोजाना मिल जा रहा है कि उसकी खपत पूरी हो सकती है।
केंद्र सरकार का दावा है कि बिजली संकट का डर बेवजह है। केंद्र सरकार के मुताबिक उसने सभी थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले के स्टॉक की समीक्षा की है। शनिवार को बिजली संयंत्रों को 19.2 लाख टन कोयला भेजा गया, जबकि खपत सिर्फ 18.7 लाख टन की थी। वहीं, कोयला मंत्रालय के मुताबिक 400 लाख टन से ज्यादा कोयले का स्टॉक कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के पास रखा हुआ है। इसके अलावा 72 लाख टन कोयला विभिन्न पॉवर प्लांट के पास भी स्टॉक में पड़े हैं।