मंगलवार को चंपारण से युवा नेता अनुपम शुरू करेंगे बेरोज़गारी के खिलाफ ‘हल्लाबोल यात्रा’

लोकसभा में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार पिछले 8 साल में मात्र 7.22 लाख नौकरियां दी गयी। जबकि बेरोजगारी का आलम ऐसा है कि इसी दौरान 22 करोड़ से भी ज्यादा युवाओं ने नौकरी के लिए फॉर्म भरा। सबसे कमाल की बात है कि जो सरकार 8 साल में 8 लाख नौकरी नहीं दे पायी, वो अब अगले डेढ़ साल में दस लाख नौकरी देने का नया जुमला दे रही है।

पटना। मंगलवार 16 अगस्त से युवा नेता अनुपम बेरोज़गारी के खिलाफ पूरे बिहार में ‘हल्लाबोल यात्रा’ की शुरुआत करने वाले हैं। पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गाँधी आश्रम से आरंभ करके बेतिया मोतिहारी के कई हिस्सों से होते हुए पहले ही सप्ताह में यात्रा सीतामढ़ी मुज़फ्फरपुर और दरभंगा जिले में प्रवेश कर जाएगी। बिहार के सभी जिलों में सभा संवाद करते हुए 23 सितंबर को पटना में सम्मेलन के साथ यात्रा का समापन होगा। इस दौरान हर जिले में स्थानीय छात्र, युवा और प्रबुद्ध नागरिक कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे ताकि व्यापक स्तर पर जनसंवाद हो सके।

राजधानी पटना स्थित गाँधी संग्रहालय में ‘युवा हल्ला बोल’ अध्यक्ष अनुपम ने यात्रा का सम्पूर्ण विवरण और कैलेंडर जारी किया। बताया गया कि किस दिन किस जिले में यात्रा पहुँचेगी। इस अवसर पर ‘युवा हल्ला बोल’ महासचिव प्रशांत कमल ने कहा कि ‘हल्लाबोल यात्रा’ बेरोज़गारी के खिलाफ होने वाले राष्ट्रीय युवा आंदोलन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि अब चुप्पी साधने या तटस्थ रहने की बजाए राष्ट्रनिर्माण के इस आंदोलन में कूदने का वक़्त आ गया है। बेरोज़गारी को राष्ट्रीय आपदा बताते हुए प्रशांत ने कहा, “प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार का वादा करके सत्ता में आए मोदी सरकार में करोड़ों रोजगार नष्ट हो गए। चाहे रेलवे हो, बैंक हो, SSC या UPSC ही क्यों न हो, हर जगह साल दर साल सीटें कम होती जा रही हैं। अग्निपथ जैसी सेना विरोधी योजना लाकर युवाओं के सपनों को ही नहीं रौंदा गया, देश की सुरक्षा को भी ठेके के हवाले किया जा रहा है। केंद्र से लेकर राज्य तक एक ही कहानी है। शिक्षकों के लाखों पद रिक्त हैं, फिर भी बहाली के नाम पर सरकार सिर्फ बहानेबाजी करती है। यहाँ तक कि प्राइवेट कंपनियों में भी ढंग का काम नहीं मिल रहा।”

‘युवा हल्ला बोल’ की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अर्जुन मिश्रा ने बेरोज़गारी के कारण बढ़ती आत्महत्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारे युवा देश के लिए यह आज सबसे बड़ा सवाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘हल्लाबोल यात्रा’ के पीछे ये भी एक उद्देश्य है कि “आत्महत्या नहीं, आंदोलन होगा” के नारे पर देशभर के युवाओं को एकजुट किया जाए। अर्जुन ने कहा, “बेरोजगारी आज जीवन मरण का सवाल बन चुका है। युवाओं में हताशा है। आत्महत्या की खबरें आम बात हो गई हैं। सरकार की कुनीतियों के कारण आम जनता बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार से त्रस्त है। भूख, प्यास और आजीविका आज संकट में है। छात्र-युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेलकर देश के उज्ज्वल भविष्य की कोई परिकल्पना बेमानी है।”

सरकारी भर्तियों को लेकर ‘युवा हल्ला बोल’ नेता रोहन कुमार ने बताया, “सरकारी क्षेत्र में भारी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद भर्तियां निकाली नहीं जा रहीं। निकलती भी हैं तो परीक्षाएं ही नहीं होती। परीक्षा हो जाए तो पेपर लीक, पेपर हो तो रिजल्ट में देरी और रिजल्ट आ जा‌ए तो नियुक्ति नहीं। असल में इनकी प्राथमिकता में नौकरी देना है ही नहीं। इनकी प्राथमिकता उन सरकारी उपक्रमों को बेचना है जो देश को फायदा और युवाओं को नौकरी देते हैं।”

बेरोज़गारी को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले युवा नेता अनुपम ने कहा कि युवाओं को जॉब चाहिए, जुमला नहीं। लेकिन दुख की बात है कि बेरोज़गार युवाओं का सरकार से भरोसा उठता जा रहा है। सरकार की नाकामियों और वादाखिलाफी के कारण बेरोज़गारी अब जीवन मरण का सवाल बन चुका है। युवाओं में व्याप्त गहरे असंतोष के कारण आज स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। ज़रूरत है इस आक्रोश को एक सकारात्मक दिशा देने की, शांतिपूर्ण समाधान के तरफ ले जाने की। यह तभी संभव है जब सरकार युवाओं को बेहतर भविष्य और राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी का ठोस भरोसा दे।