Air Pollution : प्रदूषण को लेकर नई सलाह, केंद्र ने एनसीआर में तैनात अपने कर्मियों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को कहा

याचिका पर्यावरण कार्यकर्ता आदित्य दुबे और विधि छात्र अमन बांका ने दायर की है, जिन्होंने छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त में पराली के निस्तारण वाली मशीन उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में अभी वायु प्रदूषण से राहत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी स्थिति में कोइ सुधार नहीं आ रहा है। तभी केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण के मौजूदा स्तर का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तैनात अपने सभी कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए जहां तक संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने को कहा है। कार्मिक मंत्रालय ने एक आदेश में यह बात कही।

केंद्र सरकार के विभागों को जारी आदेश में कहा गया है कि अगर कर्मचारी निजी या सरकारी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, तो उन्हें यह सलाह दी जाती है कि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने के लिए वे वाहनों को ‘पूल’ करें।
कार्मिक मंत्रालय ने सभी कर्मचारियों को कोविड-19 संबंधी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करने और हर समय मास्क पहनने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए भी कहा। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण के मौजूदा स्तर को देखते हुए, एनसीआर में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों में तैनात सभी केंद्रीय कर्मचारियों को कार्यालयों आने-जाने के दौरान सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
दूसरी ओर, उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि टेलीविजन समाचार चैनलों पर होनी वाली परिचर्चाएं दूसरी चीजों से कहीं अधिक प्रदूषण फैला रही हैं और न्यायालय में सुनवायी के दौरान दिये जाने वाले वक्तव्यों का संदर्भ से बाहर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सबका अपना एजेंडा होता है और इन बहस के दौरान दिये गए बयानों का संदर्भ से बाहर इस्तेमाल किया जा रहा है। पीठ ने कहा, ‘‘टेलीविजन परिचर्चाओं से किसी भी दूसरी चीज से कहीं अधिक प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है। उन्हें समझ में नहीं आता कि क्या हो रहा है और क्या मुद्दा है। बयानों का संदर्भ से बाहर इस्तेमाल किया जाता है। हर किसी का अपना एजेंडा होता है। हम कोई मदद नहीं कर सकते और हम इसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। हम समाधान निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’’