ग्वालियर। मध्य प्रदेश का स्मार्ट सिटी कहलाने वाला ग्वालियर इन दिनों जर्जर और धंसती सड़कों को लेकर सुर्खियों में है। ताजा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक सड़क का है, जो हाल ही में बनी थी और पहली ही बारिश में उसकी पोल खुल गई।
जानकारी के अनुसार, यह सड़क मात्र एक महीने पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई थी। लेकिन बीते 10 दिनों में यह 5 से 7 बार धंस चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। सड़क पर जगह-जगह ऐसे गड्ढे और धंसान हो चुके हैं कि देखने में लगता है जैसे नीचे सुरंग खोद दी गई हो।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी जल्दी सड़क का धंसना साफ तौर पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्य का नतीजा है। स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
गौरतलब है कि जिस क्षेत्र में यह सड़क बनाई गई, वह विशेष महत्व का इलाका माना जाता है और यहां सरकारी कामकाज की निगरानी अपेक्षाकृत अधिक होती है। बावजूद इसके, सड़क का यह हाल प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। साथ ही आमजन की ओर से यह भी मांग की जा रही है कि इस परियोजना की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्वालियर में इस तरह की घटनाएं स्मार्ट सिटी मिशन की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को भी कठघरे में खड़ा कर रही हैं।





















