Vastushashatra से आप निरोगी रह सकते हैं, जानें कैसे?

हेल्दी रहने के लिए फिटनेस रीजिम में वास्तु फॉर गुड हेल्थ भी जोड़ लें।

नई दिल्ली। यदि हम अस्वस्थ होते हैं तो स्वस्थ होने के लिए हमें औषधि अर्थात दवाई का प्रयोग करना पड़ता है । वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि –

।। उत्तरे इशानयोर्मध्ये ओषधार्थं तु कारयेत् ।।

अर्थात उत्तर और ईशानकोण के मध्य में औषधि को रखना और फिर उसे प्रयोग में लाना उचित है, लेकिन आज के परिवेश में प्रायः परिवार के सदस्य अपनी दवाइयां डाइनिंग टेबल पर रखने शुरू कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसा करना नकारात्मक श्रेणी में आता है। ऐसा करके हम चाहे-अनचाहे दवाइयों को भोजन का ही अंग बना देते हैं, ऐसा कदापि न करें। आप जब भी दवाई को सामने देखते हैं तो आप बीमारी की कल्पना करने लगते हैं, जो गलत प्रभाव पैदा करता है।

पूर्व दिशा में टॉनिक

यदि बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए घर में कुछ टॉनिक प्रयोग किए जा रहे हैं तो इनकी शीशियां आदि भवन की पूर्व दिशा में बनी आलमारियों में रखनी चाहिए, किंतु किसी बीमारी विशेष से संबंधित दवाइयां दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में बनी आलमारियों में रखें।

पिल्लो के नीचे नहीं

डबल बेड के सिरहाने अथवा तकिया के नीचे भी दवाई अथवा टेबलेट की स्ट्रिप न रखें, बल्कि इन्हें बेड से थोड़ी दूरी पर रखें ।

जल तत्व का ध्यान

वास्तु शास्त्र और विज्ञान के अनुसार शरीर की सभी बीमारियां तीन दोषों से उत्पन्न होती हैं । ये हैं कफ, पित्त और वात । ये तीनों दोष पंचतत्वों (वायु, जल, अग्रि, पृथ्वी एवं आकाश) के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं। इनमें जल तत्व का सबसे अधिक महत्व है । शरीर में जल तत्व का उचित संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक जल पीना चाहिए । सुबह-शाम स्नान करने से भी त्वचा के द्वारा शरीर को जल तत्व की प्राप्ति होती है और मन प्रसन्न रहता है