Haryana News : सांसद सुशील गुप्ता ने कहा, युवाओं को अपने प्रदेश की लोककलाओं से अगवत करना भी हमारा फर्ज

चार दशक तक हरियाणा लोक कला में छाए रहे पंडित लखमी चंद का अलग ही मुकाम रहा। उत्तरप्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में अपनी रागिनियों से लोगों के मन को मोहा। उन्होंने सामाजिक किस्सों के अलावा कभी भी समाज में अभाव की रागिनियों को तवज्जो नहीं दी। पंडित लख्मी चंद, धनपत, मेहर सिंह और मांगेराम की हजारों रागिनियां आज भी युवा कलाकार गाते है।

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी आगामी रविवार को हरियाणवी लोककला की अमर विभूति पं लखमीचंद की याद में एक दिवसीय रागनी कंपीटीशन का आयोजन कर रही है। यह कम्पटीशन हरियाणा के सभी जिलों में 17 अक्टूबर रविवार आयोजित किए जायेंगें। इसकी जानकारी आज आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद व हरियाणा के सहप्रभारी डा सुशील गुप्ता ने दी।
डा गुप्ता ने कहा कि अपने प्रदेश की लोककलाओं को बढावा देने के उदेश्य ये हरियाणवी रागनी का आयोजन करने का फैसला लिया गया है। जिसमें हरियाणा की लोककला में रूचि रखने और उसको आगे बढाने वाला व्यक्ति इसमें भाग ले सकेगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को हरियाणवी लोककला की अमर विभूति कहे जाने वाले पं. लखमी चन्द के नाम पर रखने का फैसला किया है। प्रमुख आयोजन स्थलों में कैथल, पंचकुला,फतेहाबाद, कलायत, हिसार, दादरी, सिरसा,झज्जर, समालखा, करनाल, सोनीपत, पानीपत आदि है।
डा गुप्ता ने कहा कि कुदरतन बाल अवस्था लखमी चन्द को गाने का शौक था। इसी के शौक के कारण वह हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाता रहते थे। सात-आठ वर्ष की आयु में ही उन्होंने अपनी मधुर व सुरीली आवाज से लोगों का मन मोह लिया।
आज ‘साँग’ कला हरियाणा की लोकसंस्कृति का अभिन्न अंग है। इस कला को अनेक महान शख्सियतों ने अपने ज्ञान कौशल, हुनर और परिश्रम से सींचकर अत्यन्त समृद्ध एवं गौरवशाली बनाया। ऐसी महान शख्सियतों में से एक थे सूर्यकवि पंडित लखमी चन्द। उनका जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के गाँव जांटीकलां में पंडित उदमी राम के घर 15 जुलाई, 1903 को हुआ। उनके दो भाई व तीन बहनें थीं। वे अपने पिता की दूसरी संतान थे। भले ही वे गरीबी एवं शिक्षा संसाधनों के अभावों के बीच वे स्कूल नहीं जा सके, लेकिन ज्ञान के मामले में वे पढ़े-लिखे लोगों को भी मात देते थे।
उन्होंने पंडित लख्मीचंद को नमन करने कहा कहा कि 17 अक्टूबर दिन रविवार को आम आदमी पार्टी की ओर से हरियाणा के सभी प्रदेशों में रागनी कम्पटीशन का आयोजन रखा गया है, जोकि सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलने की संभावना है। इस आयोजन का मकशद हरियाणवी लोककला को तो आगे लाना है ही साथ में बुर्जुगो द्वारा दिखाए गए रास्ते की जानकारी युवाओं को देना भी हमारा फर्ज है।