तख्तियां और नारे हमारी संसदीय परंपराओं के अनुरुप नहीं : लोकसभा अध्यक्ष

लोकसभा अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित। मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला था।विपक्षी सांसदों के व्यवहार को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ने तीखी आलोचना की है। केंद्रीय मंत्री भी विपक्षी सदस्यों के आचरण पर सवाल उठा रहे हैं।

नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों में गतिरोध जारी है। संसद का मानसून सत्र समाप्त कर दिया गया। चिंता की बात यह है कि एक दिन भी सुचारू रूप से सदन की कार्यवाही नहीं चल पाई है। कई महत्वपूर्ण बिल बिना चर्चा के केवल सदन के पटल पर रख दिए गए। विपक्षी सांसद किसान, महंगाई, पेगासस आदि के मुद्दों को लेकर हंगामा कर रहे हैं। कई बार सांसदों की आचरण को लेकर भी भी सवाल उठे हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि 17वीं लोकसभा का 6वां सत्र आज सम्पन्न हुआ। इस सत्र में अपेक्षाओं के अनुरुप सदन का कामकाज नहीं हुआ। इसे लेकर मेरे मन में दुख है। मेरी कोशिश रहती है कि सदन में अधिकतम कामकाज हो, विधायी कार्य हो और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो। इस बार लगातार गतिरोध रहा। ये गतिरोध समाप्त नहीं हो पाया। पिछले 2 वर्ष संसद के कामकाज की दृष्टि से अधिक उत्पादकता वाले रहे। इसबार कुल उत्पादकता 22þ रही। 20 विधेयक पारित हुए। ओम बिरला ने कहा कि सभी संसद सदस्यों से अपेक्षा रहती है कि हम सदन की कुछ मर्यादाओं को बनाए रखें। हमारी संसदीय मर्यादाएं बहुत उच्च कोटि की रही हैं। मेरा सभी सांसदों से आग्रह है कि संसदीय परंपराओं के अनुसार सदन चले। तख्तियां और नारे हमारी संसदीय परंपराओं के अनुरुप नहीं हैं।


दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सरकार ने सदन में पेगासस पर चर्चा का मौका नहीं दिया। अंतिम दिन तक चर्चा नहीं हुई। सरकार राज्यसभा और लोकसभा में पेगासस पर अलग-अलग बयान देती है। इस पर रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय अलग-अलग बयान देते हैं। सदन चलाने की अब जरूरत नहीं है और सदन अचानक बंद हो गया। सरकार और सत्तारुढ़ पार्टी की तरफ से हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज़ करने में कोई कमी नहीं होगी क्योंकि उनका एक ही मकसद है विपक्ष को छोटा दिखाना और सच को गुमराह करना।
कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा द्वारा राज्यसभा में रूल बुक फेंकने पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो पार्टी 2 वर्ष तक अपना अध्यक्ष न चुन पाए, जिस पार्टी के सांसद अपनी ही सरकार के बिल फाड़ दें। जो पार्टी सदन न चलने दे, जो सड़क पर भी कोई करने से शर्म महसूस करे वैसा काम सदन में करे।समझ सकते हैं कि लोकतंत्र को कितना शर्मसार करने का काम किया जा रहा है। जनता ने जिन्हें अपने मुद्दे उठाने के लिए सांसद बनाकर भेजा है वो चर्चा में भाग न लेकर चीर-फाड़ करने तक आए हैं, फाइलें फेंकने तक आए हैं। कल जो हुआ वो एक के बाद दूसरी शर्मसार करने वाली घटना थी।