बेंगलुरु। कर्नाटक के बहुचर्चित MUDA (मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) भूमि आवंटन घोटाले में एक बड़ा मोड़ आया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। यह आदेश भूमि आवंटन में अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आज मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की ओर से दायर उस अपील पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने राज्यपाल द्वारा MUDA घोटाले की जांच की मंजूरी को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है और इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री की पत्नी को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए। मामले की अगली सुनवाई अब 4 सितंबर को होगी।
MUDA घोटाला कर्नाटक के मैसूर क्षेत्र में शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा भूमियों के कथित अवैध आवंटन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों और उनके परिजनों को नियमों के विरुद्ध जमीनें आवंटित की गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
इस मुद्दे पर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेरता रहा है। अब न्यायालय द्वारा मुख्यमंत्री की पत्नी को नोटिस जारी किए जाने के बाद, मामला और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।
भाजपा और जद(एस) जैसे विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर पहले भी सीएम सिद्धारमैया से इस्तीफे की मांग की थी।
अब देखना होगा कि 4 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत क्या रुख अपनाती है, और इस घोटाले की जांच किन दिशा में आगे बढ़ती है।मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए यह एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है। अब सबकी निगाहें 4 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि MUDA घोटाले की जांच कितनी गहराई तक जाएगी और क्या मुख्यमंत्री की कुर्सी भी खतरे में आ सकती है।

















