हिंदी साहित्य को क्षति, नहीं रहीं प्रख्यात लेखिका मन्नू भंडारी

महाभोज की रचनाकार हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका मन्नू भंडारी इहलोक को छोड़कर सोमवार को परलोक सिधार गई। कहानी 'यही सच है' पर बासु चैटर्जी ने 1974 में 'रजनीगंधा' फिल्म भी बनाई थी। 1979 में प्रकाशित उनका उपन्यास 'महाभोज' मील का पत्थर साबित हुआ।

नई दिल्ली। हिंदी साहित्य में अपनी लेखनी से महिलाओं को नई राह और आत्मविश्वास जगाने वाली लेखिका मन्नू भंडारी नहीं रहीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिंदी की प्रख्यात लेखिका मन्नू भंडारी का सोमवार को हरियाणा में, गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है। वह 91 वर्ष की थी। रचना ने बताया कि मन्नू भंडारी का अंतिम संस्कार मंगलवार को दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा।

‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ जैसे प्रसिद्ध उपन्यासों की रचनाकार मन्नू भंडारी पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। उनकी बेटी रचना यादव ने फोन पर बताया, “ वह करीब 10 दिन से बीमार थीं। उनका हरियाणा के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां आज दोपहर को उन्होंने अंतिम श्वांस ली। ”

तीन अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश के भानपुरा में जन्मीं भंडारी प्रसिद्ध साहित्यकार राजेंद्र यादव की पत्नी थीं। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापिका के पद पर भी अपनी सेवाएं दीं। नई कहानी की सशक्त हस्ताक्षर मन्नू भंडारी की पहचान ‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ जैसे उपन्यासों से है, पर कई दशकों तक लगातार लेखन में सक्रिय रहने वाली मन्नू भंडारी ने इसके इतर दूसरे विषयों पर भी अपनी कलम चलाई है। ‘आपका बंटी’, ‘मैं हार गई’, ‘तीन निगाहों की एक तस्वीर’, ‘एक प्लेट सैलाब’, ‘यही सच है’, ‘आंखों देखा झूठ’ और ‘त्रिशंकु’ जैसी महत्वपूर्ण कृतियों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा।