नहीं रहे महान धावक मिल्खा सिंह, कोरोना ने ली जान

91 वर्षीय महान धावक मिल्खा सिंह ने शुक्रवार की देर रात अंतिम सांस लीं। चंडीगढ के अस्पताल में वो महीना भर से जंग लड रहे थे। बीते रविवार को उनकी पत्नी निर्मल कौर का भी देहांत कोरेाना से ही हो गया था।

नई दिल्ली। पहले पत्नी और अब पति की कोरोना ने ले ली जान। एक भारतीय टीम की पूर्व बाॅलीवुड कप्तान और एक पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाले धावक। हम बात कर रहे हैं मिल्खा सिंह की। 91 साल के इस धावक ने करीब महीना भर तक कोरोना से जंग लडा और आखिरकार शुक्रवार की देर रात सांसों ने इनका साथ छोड दिया।

बता दें कि चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल के आईसीयू में इन्हें भर्ती किया गया था। यहां पर इनका इलाज चल रहा था। बीते रविवार को रविवार को मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर का भी कोरोना की वजह से मोहाली के एक अस्पताल में निधन हो गया था। पत्नी की अंतिम संस्कार में ये नहीं जा पाए थे।

केंद्रीय खेल एवं युवा मंत्री किरण रिजिजू ने मिल्खा सिंह के निधन पर शेाक संवेदना प्रकट की और कहा कि मैं उनकी अंतिम इच्छा पूरी करूंगा।

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नंवबर 1929 को पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान का हिस्सा) के गोविंदपुरा में राठौड़ राजपूत सिख परिवार में हुआ था। बचपन से लोग इन्हें प्रतिभावान मानते थे। युवा हुए तो इन्होंने अपनी प्रतिभाक का परिचय दिया। मिल्खा सिंह ने रोम के 1960 समर ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। जब ये दौडते थे, तो लोग इनकी स्पीड देखकर चैंक जाते थे। खेलों की दुनिया में इन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से लोग जानते थे। यह उपनाम इनका प्रसिद्ध हो गया था। मिल्खा सिंह ने 4 बार एशियन गेम्स में गोल्ड जीता हैं। 1958 में कॉमनवेल्थ गेम्स के चैंपियन भी रहे हैं। साल 1959 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

इनके निधन पर लोगों ने इन्हें श्रद्धांजलि दी है। भारतीय खेल की दुनिया में लोग सदा इन्हें याद करते रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान धावक मिल्खा सिंह के निधन पर अपने संदेश में इसे भारतीयों के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।