राम पथ पर बंद होंगी शराब और मांस की दुकानें: अयोध्या नगर निगम का बड़ा फैसला

 

अयोध्या, उत्तर प्रदेश। श्रीराम नगरी अयोध्या के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए अयोध्या नगर निगम (AMC) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राम पथ पर शराब और मांस की सभी दुकानों को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया है। यह निर्णय क्षेत्र की आध्यात्मिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

नगर निगम की कार्यकारी समिति ने गुरुवार को हुई बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया, जिसमें सड़क के धार्मिक महत्व का हवाला दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार, अब राम मंदिर तक जाने वाले 13 किलोमीटर लंबे राम पथ पर शराब और मांस की कोई दुकान नहीं खोली जाएगी। यह पथ सआदतगंज से लता मंगेशकर चौक तक फैला है और इसे हाल ही में चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के तहत विकसित किया गया है।

महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा, “राम पथ भगवान श्रीराम के नाम पर है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत पवित्र है। ऐसे में इस मार्ग पर शराब और मांस की बिक्री इसकी पवित्रता को ठेस पहुंचा सकती है, इसलिए यह प्रतिबंध आवश्यक है।” उन्होंने बताया कि समिति के सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

व्यापारियों में चिंता, पुनर्वास की मांग
इस फैसले के बाद स्थानीय व्यापार संघ में चिंता की लहर दौड़ गई है। प्रभावित दुकानदारों के लिए वैकल्पिक स्थानों की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है, ताकि उनका व्यवसाय प्रभावित न हो।

धार्मिक क्षेत्र में अन्य प्रतिबंध भी लागू
महापौर त्रिपाठी ने यह भी घोषणा की कि राम जन्मभूमि मंदिर के आसपास के क्षेत्र अयोध्या धाम में अब सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और इनरवियर के विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा। उन्होंने कहा, “ऐसे उत्पादों का प्रचार इस पवित्र स्थल की गरिमा के अनुकूल नहीं है।”

प्रशासन को भेजा गया पत्र
महापौर ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट को शराब बिक्री पर प्रतिबंध लागू करने के लिए औपचारिक रूप से सूचित किया जा चुका है। वहीं, मांस की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा गया है।

जिला आबकारी अधिकारी सुरेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्हें प्रस्ताव की जानकारी है, लेकिन अभी आधिकारिक रूप से प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। प्रस्ताव मिलने के बाद इसे राज्य सरकार को अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा।

अयोध्या में यह निर्णय न केवल धार्मिक भावनाओं के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह सरकार के उस दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें धार्मिक स्थलों की मर्यादा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।